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Gen-Z आंदोलन और चुनाव आयोग पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की दो टूक, बोले- नई पौध से टकराना सत्ता को पड़ेगा भारी

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:33 PM (IST)Updated: Mon, 28 Sep 2026 06:40 PM (IST)

ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जेन-जी आंदोलन पर कहा कि युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं ...और पढ़ें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। (फाइल फोटो)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को समझना जरूरी।

  2. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।

  3. निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रसंघ चुनाव की वकालत की।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जबलपुर प्रवास के दौरान जेन-जी आंदोलन, सरकार और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं और मांगों को समझने की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि सरकार युवाओं के साथ टकराव का रास्ता अपनाती है, तो आंदोलन से नई राजनीतिक पीढ़ी के उभरने की स्थिति बन सकती है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी की। उन्होंने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए और निर्वाचन प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने पर जोर दिया।

'युवाओं का आंदोलन उनकी पीड़ा की अभिव्यक्ति'

जेन-जी आंदोलन का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने युवाओं की स्थिति की तुलना पैर में कांटा चुभने पर बच्चे के रोने से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बच्चा अपनी पीड़ा को सहज रूप से व्यक्त करता है, उसी तरह नई पीढ़ी भी अपनी परेशानियों और असंतोष को आंदोलन के माध्यम से सामने रख रही है।

उन्होंने सरकार से युवाओं की जायज मांगों पर ध्यान देने और समाधान की दिशा में जल्द कदम उठाने की बात कही। साथ ही कहा कि आंदोलन को दबाने या लंबे समय तक खींचने की कोशिश के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

1974 के जेपी आंदोलन का दिया उदाहरण

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 1974 के जयप्रकाश नारायण आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस आंदोलन के दौर से आगे चलकर कई राजनीतिक नेता उभरे थे। उन्होंने इसी संदर्भ में वर्तमान युवा आंदोलन को लेकर भी कहा कि लंबे समय तक युवाओं को राजनीतिक और लोकतांत्रिक मंच नहीं मिलने पर नई राजनीतिक नेतृत्वकारी पीढ़ी सामने आ सकती है।

उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी और अपनी बात रखने के पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग

निर्वाचन व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है और नई नियुक्ति पारदर्शी एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।

यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

युवाओं से संवाद पर जोर

शंकराचार्य की टिप्पणियों का केंद्रीय संदेश युवाओं के आंदोलन को लेकर संवाद और उनकी मांगों को सुनने का रहा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने के अवसर मिलना जरूरी है। वहीं, चुनाव व्यवस्था को लेकर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग रखी।