वाराणसी में नाना पाटेकर ने युवाओं से कहा था- सिर्फ लेना नहीं, समाज को देना हो तभी फिल्मों में आएं; अब यादों में रह गया वह संवाद
प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया, जिससे फिल्म जगत में शोक ...और पढ़ें

दिसंबर 2024 के वाराणसी जागरण फिल्म फेस्टिवल में आएं थे नाना पाटेकर। जागरण
HighLights
नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया।
वाराणसी में युवाओं को फिल्मों में समाज को देने का संदेश दिया।
उन्होंने एकल परिवार और बुजुर्गों की अनदेखी पर गहरी चिंता जताई थी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है।
नाना पाटेकर की काशी यात्रा और यहां युवाओं से हुआ उनका संवाद अब उनकी यादों का हिस्सा बन गया है। दिसंबर 2024 के वाराणसी जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान उन्होंने युवाओं को फिल्मों में आने की वजह को लेकर बेहद साफ संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि युवा पीढ़ी फिल्मों की तरफ आकर्षित होती है, लेकिन उन्हें तय करना होगा कि वे फिल्मों में क्यों आना चाहते हैं। सिर्फ शोहरत और पैसे के लिए फिल्मों में आने के बजाय अगर समाज को कुछ देने की चाहत है तो जरूर इस क्षेत्र में आएं।
नाना ने कहा था कि कैमरे में बहुत ताकत होती है। इसके जरिये समाज को अच्छा और बुरा दोनों संदेश दिया जा सकता है। उनके अनुसार फिल्मों का बुरा प्रभाव अधिक पड़ता है और अच्छा प्रभाव कम, इसलिए फिल्मकारों और कलाकारों को प्रयास करना चाहिए कि कैमरे के माध्यम से समाज को बेहतर संदेश दिया जाए।
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वह जागरण फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन जेएचवी माल में युवाओं से रूबरू हुए थे। उनके साथ गदर-2 में काम कर चुके उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर भी मौजूद थीं। नाना ने उस दौरान समाज में बढ़ती विसंगतियों पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इन्हें दूर करने के लिए हर व्यक्ति को अपनी तरफ से प्रयास करना होगा।
एकल परिवार और बुजुर्गों की अनदेखी पर जताई थी चिंता
नाना पाटेकर ने समाज की सबसे बड़ी समस्याओं में एकल परिवार और उसमें बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी को बताया था। उनकी आगामी फिल्म वनवास भी इसी तरह की सामाजिक समस्या पर आधारित थी। उन्होंने कहा था कि सफलता और विफलता दोनों जिंदगी का हिस्सा हैं। सफलता का आनंद मिलता है तो विफलता की तकलीफ भी जीवन में आती है, इसलिए असफलता से निराश नहीं होना चाहिए।
उत्कर्ष शर्मा ने उस समय नाना के साथ काम करने का अनुभव साझा करते हुए कहा था कि उन्हें नाना से अधिक युवा कोई नहीं दिखा। उन्होंने कहा था कि नाना ने जीवन में कितनी भी सफलताएं और विफलताएं देखी हों, लेकिन उनका असर उनके व्यक्तित्व पर नहीं पड़ा। वह हर समय लोगों को प्रोत्साहित करते रहते हैं।

उत्कर्ष ने बताया था कि वनवास में वह बनारसी छोरे की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए यह चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि बनारसी किरदार सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि ग्लोबल पहचान वाला है। सिमरत कौर ने बताया था कि वह फिल्म में बनारस की नौटंकी वाली की भूमिका में थीं।
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जवानों के बीच पहुंच गए थे नाना
जागरण फिल्म फेस्टिवल में 95 बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर और जवान भी मौजूद थे। संवाद के दौरान नाना मंच से उतरकर जवानों के पास पहुंचे और उनसे बातचीत की। उन्होंने जवानों को देश का गौरव बताते हुए कहा था कि हर व्यक्ति को उनका सम्मान करना चाहिए।
काशी में नाना पाटेकर के कहे ये शब्द अब उनकी स्मृतियों में दर्ज हैं। खासकर युवाओं के लिए उनका यह संदेश कि फिल्मों से सिर्फ लेना नहीं, बल्कि समाज को कुछ देना भी जरूरी है, उनके व्यक्तित्व और सोच की एक झलक देता है।
