यूपी के डिप्टी सीएम ने कहा, उन्नाव की पहचान अब लखनऊ-कानपुर के बीच पिसने वाले जिले की नहीं, विकास की नई संभावनाओं की
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्नाव को कलम और तलवार की धरती बताते हुए उसके विकास की नई संभावनाओं पर ...और पढ़ें

HighLights
उन्नाव कलम और तलवार की धरती, विकास की नई ऊंचाइयों पर
कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ महत्वपूर्ण विस्तार
एक जिला, एक उत्पाद से उन्नाव को मिलेगी नई पहचान
जागरण संवाददाता, कानपुर। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उन्नाव कलम और तलवार की धरती है। इस जिले ने स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और चंद्रशेखर आजाद जैसी विभूतियों की भूमि उन्नाव की पहचान आज भी देश-दुनिया में है।
अब समय है कि इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को विकास की नई ऊंचाइयों से जोड़ा जाए। दैनिक जागरण की ओर से आयोजित विमर्श में उन्नाव के विकास पर चर्चा सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजन जिले की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा तय करने में मदद करते हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नाव से उनका भावनात्मक रिश्ता है। वह लखनऊ से विधायक हैं, लेकिन उन्नाव का नाम आते ही अपनेपन का एहसास होता है। करीब दो दशक पहले तक अक्सर कहा जाता था कि उन्नाव लखनऊ और कानपुर के बीच दबकर रह गया है। अब इस धारणा को बदलने का समय है। सवाल यह नहीं कि पहले क्या था, बल्कि यह है कि उन्नाव को और बेहतर कैसे बनाया जाए।
कानून-व्यवस्था में आया बड़ा बदलाव
ब्रजेश पाठक ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि परिवार अपनी बेटियों को शाम पांच बजे तक घर लौट आने की हिदायत देते थे। जरूरी काम होने पर उन्हें किसी पुरुष सदस्य के साथ भेजा जाता था। अपराध, गुंडागर्दी और माफिया का भय आम लोगों के जीवन को प्रभावित करता था। सड़कों की हालत खराब थी और बिजली की समस्या से व्यापार तथा खेती दोनों प्रभावित होते थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपराधियों और संगठित माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। कानून के सामने किसी को छोटा-बड़ा या गरीब-अमीर देखकर नहीं, बल्कि अपराध के आधार पर कार्रवाई करने की नीति अपनाई गई है। बेहतर कानून-व्यवस्था विकास और निवेश के लिए जरूरी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विस्तार
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वर्ष 2017 से पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या सीमित थी, लेकिन अब प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 85 तक पहुंचने का दावा करते हुए उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में हुए विस्तार का उल्लेख किया। एमबीबीएस और विशेषज्ञ चिकित्सा पाठ्यक्रमों की सीटों में वृद्धि से युवाओं को अवसर मिले हैं। मेडिकल कॉलेजों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा की स्थिति पर उन्होंने कहा कि पहले कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। बच्चों को जूते-मोजे तक उपलब्ध नहीं होते थे और बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल छोड़ देते थे। वर्तमान सरकार ने विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। माध्यमिक शिक्षा में नकल माफिया पर नियंत्रण और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए गए हैं।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रत्येक मंडल में विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया गया था। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में विश्वविद्यालयों के विकास की दिशा में काम हुआ है और सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में भी विस्तार हुआ है।
उद्योग और निवेश से रोजगार की उम्मीद
ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब उद्योग और निवेश के लिए तेजी से उभर रहा है। मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदेश ने अपनी क्षमता दिखाई है। लखनऊ में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों का निर्माण हो रहा है, जबकि नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि उद्योगों के विस्तार से युवाओं को रोजगार मिले और उन्हें काम की तलाश में अपने घर-परिवार से दूर न जाना पड़े। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बजट में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए।
विरासत के साथ विकास भी जरूरी
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क, बिजली, पानी और उद्योग तक सीमित नहीं है। अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने विरासत के संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है।
उन्होंने इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोग अपनी परंपराओं और पूर्वजों से जुड़े सांस्कृतिक संबंधों को महत्व देते हैं। भारत में भी अपनी विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहिए।
एक जिला, एक उत्पाद से बढ़ेगी पहचान
ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में कोई न कोई विशिष्ट उत्पाद, कला या खाद्य परंपरा है। लखनऊ की चिकनकारी, प्रतापगढ़ का आंवला, भदोही का कालीन और मुरादाबाद के हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के माध्यम से पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है। उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर जोर देने से उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि उन्नाव में भी ऐसे उत्पादों और स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। यहां के युवाओं को रोजगार, विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और जिले को मजबूत औद्योगिक पहचान मिलनी चाहिए।
अंत में उप मुख्यमंत्री ने दैनिक जागरण परिवार का आभार जताते हुए कहा कि उन्नाव के विकास पर संवाद आयोजित करना महत्वपूर्ण है। जिले की समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि उन्नाव अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर सके।
