हृदयविदारक: उन्नाव में पिता की पेड़ से गिरकर मौत, शव घर पहुंचा तो 4 साल की बेटी ने भी तोड़ा दम, रो पड़ा पूरा गांव
उन्नाव में पेड़ से गिरे युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद जब शव घर पहुंचा, तो उसकी चार ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
पिता की पेड़ से गिरने के बाद इलाज के दौरान मौत हुई
शव घर पहुंचने पर चार साल की बेटी ने भी दम तोड़ा
पूरे गांव में शोक की लहर, एक साथ अंतिम संस्कार किया गया
जागरण संवाददाता, उन्नाव। उन्नाव से सामने आई हृदयविदारक घटना ने हर किसी का कलेजा चीर दिया। बाप बेटी के दर्दनाक अंत से पूरा गांव रो पड़ा। पिता का शव देख चार साल की बेटी भी सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और दुनिया को अलविदा कह गई। दोनों की एक साथ उठी अर्थी ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
उन्नाव के मौरावां क्षेत्र में पेड़ से गिरे युवक की 37 दिन बाद लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो चीत्कार के बीच एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित चार साल की बेटी की भी सांसें थम गई। एक तरफ पति व दूसरी तरफ बेटी का शव देख पत्नी बिटोल कांप गई। दोहरे दर्द ने उसे पूरी तरह तोड़कर रख दिया।
क्षेत्र के भगवान थोक मवई निवासी 30 वर्षीय श्यामबाबू 13 अगस्त को गांव के ठेकेदार राधेश्याम के साथ लकड़ी काटने गया था। पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काटने के दौरान वह नीचे गिरकर गंभीर रूप से से घायल हो गया। स्वजन ठेकेदार के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा श्यामबाबू को लखनऊ के केजीएमयू लेकर चले गए। तब से वहीं इलाज चल रहा था।
शनिवार देर रात श्यामबाबू की इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर लगभग तीन बजे शव घर पहुंचा तो चीत्कार मच गई। इसी बीच श्यामबाबू की चार साल की बेटी अल्लो की भी सांसें थम गई। अल्लों को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। स्वजन क्षेत्र में ही मेडिकल स्टोर से दवा देकर बुखार कम करने की कोशिश कर रहे थे।
पति के शव से बिलख रही बिटोल बेटी अल्लों की मौत से बेहाल हो गई। उधर, बेटे श्यामबाबू व पौत्री अल्लों की मौत से मां बिंदादेई व अन्य स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। स्वजन पूर्व में दर्ज मुकदमे में धाराएं बढ़ाने की पुलिस से मांग की। कहा कि लकड़ी कटाई के दौरान घटना की जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गांव स्थित खेत पर पिता-पुत्री के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। प्रभारी निरीक्षक कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, श्यामबाबू के चार संतान थी जिसमें दो बेटे भोंदू, अनुभव, बेटी नीलू और अल्लों थी। अल्लों चारों भाई बहन में तीसरी संतान थी। जहां खेत में पिता का अंतिम संस्कार किया गया उसी के पास बेटी को मिट्टी में दबाया गया।
