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दीपावली पर पुरवा की मशहूर त्रिलोकपरी मिठाई की धूम, विदेशों तक पहुंच रही मिठास

Published: Tue, 03 Nov 2026 01:46 PM (IST)

दीपावली पर पुरवा की पारंपरिक त्रिलोकपरी मिठाई भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को भोग लगाने के लिए खास महत्व रखती ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पुरवा की त्रिलोकपरी दीपावली पर विशेष महत्व रखती है

  2. यह मिठाई शक्कर और तिल से पारंपरिक रूप से बनती है

  3. इसकी मांग स्थानीय और विदेशी बाजारों में भी है

संवाद सहयोगी, पुरवा(उन्नाव)। दीपावली पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को लईया, चूरा, खील, शक्कर के गट्टे, खिलौने और त्रिलोकपरी चढ़ाने की परंपरा पुरानी हैं। पुरवा कस्बे में शक्कर और तिल्ली से बनने वाली त्रिलोकपरी का खास महत्व हैं। इसकी मांग दीपावली पर बढ़ जाती हैं और मिठाई की बिक्री खूब होती हैं।


कार्तिक मास में दीपावली के लिए शक्कर से बनी मिठाइयों की बिक्री दशहरा के बाद शुरू हो जाती हैं। कस्बे की आधा दर्जन से अधिक दुकानों पर कारीगर इसे बनाने में दिन-रात जुटे रहते हैं। त्रिलोकपरी खरीदने ग्रामीण इलाकों के लोग भी मुख्य बाजार पहुंचते हैं। कई दुकानों में यह मिठाई पांच पीढ़ियों से बनाई जा रही हैं। कस्बे के लोग खिलौने और गट्टों की तुलना में इसे अधिक पसंद करते हैं। अब बड़े शहरों में भी इसकी मांग हैं और लोग इसे यहां से मंगाते हैं। अन्य जगहों की तुलना में इसकी बिक्री दस गुना अधिक बताई जाती हैं।


राजा बाजार निवासी दुकानदार छोटेलाल आर्य के मुताबिक, उनके परिवार में चार पीढ़ियों से त्रिलोकपरी बन रही हैं। इसकी चाशनी को पहले फेंटा जाता हैं। फिर लोई बनाकर उसमें सफेद तिल लपेटे जाते हैं और उसे बेलन से बेला जाता हैं। दूसरे स्थानों पर लोई को पाटे से दबाया जाता हैं, जिससे मिठाई मोटी बनती हैं। पुरवा की त्रिलोकपरी पतली और खुश्क होती हैं, जिससे इसका स्वाद अलग होता हैं। लोग इसे रिश्तेदारों को भी भेजते हैं। आर्य के अनुसार, पहले लोग इसे ही मिठाई के रूप में घर ले जाते थे। आज भी खास स्वाद के कारण यह घरों में खाई जाती हैं।


कस्टोलवा निवासी दुर्गेश गुप्ता ने बताया कि उनके परिवार में पीढ़ियों से त्रिलोकपरी आती रही हैं और वे इसी का मां लक्ष्मी को भोग लगाते हैं। इसी मोहल्ले के दीपक मिश्रा इसे कई वर्षों से बनते देख रहे हैं। वे दीपावली पर यह मिठाई विदेश में रहने वाले अपने भाई को भेजते हैं।


पुरवा में बनने वाली त्रिलोकपरी हमारे घर पर पीढ़ियों से आ रही हैं। हम लोग त्रिलोकपरी से ही मां लक्ष्मी को भोग लगाते हैं।
- दुर्गेश गुप्ता

 


कस्बे में त्रिलोकपरी कई वर्षो से बन रही हैं। इसकी मिठास के आगे सब मिठाइयां फीकी हैं। त्रिलोकपरी को वह विदेश में रहने वाली भाई को दीवाली पर भेजते हैं।
- दीपक मिश्रा

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