Lucknow Kanpur Expressway: 4200 करोड़ खर्च कर बने NHAI के एक्सप्रेसवे की दुर्दशा, 24 घंटे में 4 जगह और धंसा
Lucknow Kanpur Expressway की लखनऊ-उन्नाव लेन पर कई जगहों पर सड़क धंसने की समस्या सामने आई है, उद्घाटन के एक ...और पढ़ें
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लखनऊ से कानपुर लेन पर किमी संख्या 53.6 व 53.7 के बीच धंसी सड़क। जागरण
HighLights
मंगलवार को लखनऊ-उन्नाव लेन पर किमी 62.3 गांव कोरारी के पास 30 मीटर धंसी थी सड़क
बुधवार को भवानीखेड़ा, अड़ेरुवा और इजरायल खेड़ा के पास सड़क में धंसकर नालियां बनीं
जागरण संवाददाता, उन्नाव। Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की लखनऊ उन्नाव लेन पर धंसने की समस्या सामने आने लगी है। बुधवार को चार जगह सड़क धंसी मिली। इजरायल खेड़ा के पास तो लंबी नालियां बन गई हैं। इस लेन पर मंगलवार को भी खराबी मिली थी। अभी लखनऊ की ओर से भारी वाहन आ रहे हैं। एक जगह उन्नाव-लखनऊ लेन पर भी 100 मीटर सड़क धंसी है।
बुधवार को इसी लेन पर इंडियन रोड सर्वे एंड मैनेजमेंट (आइआरएसएम) की टीम अपने मशीनों से सड़क की जांच करती मिली। टीम के सदस्यों ने बताया कि दोनों लेन पर प्रत्येक 100 मीटर पर सड़क की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक नवरतन ने बताया कि एक्सप्रेसवे की जांच हो रही है। रिपोर्ट जल्द आने वाली है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लखनऊ से उन्नाव लेन पर किमी संख्या 40 बछौरा गांव के पास नई बिुटमिन बिछाने के लिए मशीन से उखाड़ी गयी पुरानी लेयर। जागरण
उन्नाव से लखनऊ के बीच 4200 करोड़ रुपये खर्च कर बने एनएचएआइ के एक्सप्रेसवे की दुर्दशा हो गई है। इसे आगरा की पीएनसी इन्फ्राटेक ने बनाया है। उद्घाटन के एक माह में ही चार दर्जन से ज्यादा स्थानों पर सड़क या तो धंस चुकी है या उखड़ गई है। बुधवार को लखनऊ-उन्नाव लेन पर भवानी खेड़ा के पास किमी 53.6 से 53.7 तक 100 मीटर धंसने की समस्या आई है। डिवाइडर में भी दरारें हैं।
अड़ेरुआ के पास किमी संख्या 60.3 के पास 60 मीटर और इजरायलखेड़ा के पास किमी संख्या 62.9 पर सड़क धंसने से नालियां बन गई हैं। उन्नाव-लखनऊ लेन में भी गांव जगेथा के पास किमी 50.4 पर सड़क दोबारा 100 मीटर तक धंस गई है। यहां तीन दिन पहले ही पैचवर्क किया गया था। इसी लेन पर बछौरा के पास किमी संख्या 40 पर धंसी सड़क की मरम्मत शुरू हो गई है।
डीएम-एसपी ने देखी हालत
डीएम घनश्याम मीना व एसपी जय प्रकाश सिंह बुधवार को एक्सप्रेसवे की स्थिति जानने पहुंचे। किमी संख्या 51.2 के निकट झाऊ खेड़ा में सड़क देखी। इस दौरान डीएम को तमाम स्थानों पर एक्सप्रेसवे के निकट लगाई गई जालियां कटी मिली। इससे होकर ग्रामीण अपने मवेशी एक्सप्रेसवे पर चढ़ा देते हैं। डीएम ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को सभी जालियां सही करवा कर रिपोर्ट देने की बात कही है।
किनारे की मिट्टी मजबूत करने के लिए जांच
एक्सप्रेसवे धंसने के पीछे तह तक पानी पहुंचने को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इस समस्या की तह तक जाने के प्रयास भी शुरू हुए हैं। बुधवार को एक कंपनी के कुछ कर्मचारी उन्नाव-लखनऊ लेन पर बाबा खेड़ा के पास किमी संख्या 30.9 पर जांच करते दिखे। उन्होंने बताया कि वे पता करने का प्रयास कर रहे हैं कि पानी कितनी गहराई तक पहुंचा है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 175 मीटर कच्चे किनारे पर जांच का ट्रायल किया जा रहा है।
जांच और समाधान शुरू
जांच और समाधान के लिए एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) विधि का प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत पानी डालकर देखा जाएगा कि मिट्टी ने कितना पानी सोखा और कितनी गहराई तक गया। यदि पानी मिट्टी की सतह को पार नहीं कर पाएगा तो एनएचएआइ के निर्देश पर हम यह कार्य एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड क्षेत्र में करेंगे। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि बारिश का पानी सड़क के नीचे किस तरह पहुंचेगा, मिट्टी कितना पानी सोखेगी और पानी की नमी का सड़क की मजबूती पर कितना असर पड़ेगा। तकनीकी टीम यह भी जांच कर रही है कि लेयर के जरिए पानी को स्लोप की तरफ डायवर्ट किया जा सकता है या नहीं और बेस में पानी जाने से रोका जा सकता है या नहीं।
क्या है एफडीआर तकनीक
एफडीआर तकनीक में सड़क बनाने में प्रयोग की गई सामग्री को रिसाइकिल कर फिर उसी स्थान पर उसी सामग्री का प्रयोग कर मार्ग को दुरुस्त किया जाता है। यह तकनीक संबंधित निर्माण में 40 प्रतिशत बजट भी कम करती है।
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