गोमती किनारे उगने वाले मूंज से बदली सीतापुर की महिलाओं की किस्मत, घर बैठे कमा रहीं लाखों; विदेशों तक पहुंचे उत्पाद
सीतापुर की विजय लक्ष्मी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को मूंज के उत्पाद बनाने का हुनर सिखाकर ...और पढ़ें
-1791805837073_m.webp)
HighLights
विजय लक्ष्मी ने 400 से अधिक महिलाओं को मूंज शिल्प से जोड़ा।
मूंज के उत्पादों से महिलाएं सालाना 1-1.25 लाख रुपये कमा रहीं।
जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भी डलियों का बड़ा ऑर्डर मिला।
आलोक त्रिवेदी, संदना (सीतापुर)। केसुवामऊ की विजय लक्ष्मी ने हजारों जरूरतमंद महिलाओं में स्वावलंबन का हुनर पैदा किया। विजय लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। 25 समूहों को जोड़कर सरायन फार्मर का नाम दिया। यह समूह मूंज की डलिया बनाता है। 25 समूहों में करीब 400 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। यह महिलाएं अपने हुनर से मूंज की डलिया तैयार कर विभिन्न आकृतियों व रंगों से सजाती हैं।
वर्तमान समय में इन डलियों की आपूर्ति कई प्रदेशों में है। मूंज बड़े पैमाने पर गोमती नदी के आसपास उपलब्ध होती है। डलिया बनाने में लागत भी शून्य आती है। विजय लक्ष्मी बताती हैं कि एक समूह बनाकर काम शुरू किया। उत्पादों की मांग बढ़ी तो महिलाएं जुड़ती गईं और समूहों की संख्या बढ़ती रही। सभी को जागरूक कर कई तरह के उत्पाद बनाने शुरू किए। आजीविका मिशन, आकांक्षा समिति का सहयोग मिला।
डालमिया फाउंडेशन की ओर से डिजाइन का प्रशिक्षण दिलाया गया। साधारण परिवारों की यह महिलाएं आज अपनी कला व हुनर के दम पर प्रति वर्ष करीब एक से सवा लाख रुपये तक घर बैठे कमा रही हैं। इससे महिलाओं की माली हालत सुधर गई। इनके बच्चे लखनऊ के स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
यह तैयार हो रहे उत्पाद
समूह की महिलाएं गोमती नदी के किनारे उगने वाले मूंज से डलिया, कैसरोल, पूजा बास्केट, फ्लावर बास्केट, फ्रूट बास्केट, ट्रे कोस्टर, बोतल कवर, स्लीपर, शोपीस आदि आकर्षक उत्पाद तैयार करती हैं। इन उत्पादों का सरायन फार्मर कंपनी के माध्यम से कारोबार हो रहा है।
मेला व प्रदर्शनी में लगते स्टाल
राष्ट्रीय आजीविका मिशन व आकांक्षा समिति के माध्यम से महिलाएं दिल्ली, नोएडा, लखनऊ से लेकर महाराष्ट्र तक अपने स्टाल लगाकर आय कमा रही हैं। महाकुंभ में भी स्टाल लगाकर बिक्री की गई थी।
विदेशी मेहमानों को दिए गए उपहार
दिल्ली में सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से सरायन फार्मर को डलिया आपूर्ति के लिए साढ़े सात लाख रुपये का आर्डर मिला था। शिखर सम्मेलन में आए विदेशी मेहमानों को इन डलियों में उपहार के रूप में मिलेट्स रखकर दिए गए थे।
