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सुई-धागे से बुना आत्मनिर्भरता का ताना-बाना, सीतापुर में महिलाओं को हुनरमंद बना रहीं चांदनी

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:28 PM (IST)

सीतापुर की चांदनी मिश्रा तपोधाम आश्रम में सिलाई केंद्र चलाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। उन्होंने 525 से अधिक ...और पढ़ें

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HighLights

  1. चांदनी मिश्रा सीतापुर में चलाती हैं सिलाई केंद्र।

  2. 525 से अधिक महिलाओं को दिया निःशुल्क प्रशिक्षण।

  3. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर दे रही हैं नई दिशा।

जागरण संवाददाता, सीतापुर। सुई-धागों से सिर्फ कपड़े ही नहीं सिले जाते बल्कि हुनर के सहारे आत्मनिर्भरता की नई राह भी बुनी जा सकती है। इसी सोच को साकार कर रही हैं शास्त्री नगर निवासी चांदनी मिश्रा। वह मुहल्ले के ही तपोधाम आश्रम में छह वर्ष से सिलाई केंद्र संचालित कर रही हैं। इस दौरान 12 प्रशिक्षण शिविरों में 525 महिलाओं को नि:शुल्क सिलाई का प्रशिक्षण दे चुकी हैं, जबकि वर्तमान सत्र में 25 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं।

उनकी यह पहल उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो पारिवारिक जिम्मेदारियों या आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर तलाश रही हैं। चांदनी मिश्रा ने सुई-धागों के माध्यम से उनके हुनर और भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास कर रही हैं।

कौशल को दिखाई स्वावलंबन की राह
चांदनी मिश्रा के पास सिलाई का हुनर था। उनका भी मन था कि वह इस कौशल को अपने रोजगार का हिस्सा बनाएं। वर्ष 2020 में तपोधाम आश्रम में सेवा भारती की ओर से केंद्र संचालित किया गया। पदाधिकारियाें को एक कुशल, जिम्मेदार महिला जोकि केंद्र का संचालन कर सके की आवश्यकता लगी। चांदनी को जब पता चला तो वह अपने आप को रोक न सकीं और केंद्र में अपना आवेदन कर दिया। उनका संचालिका पद पर चयन भी हो गया। आसपास मुहल्लों में प्रशिक्षण की इच्छुक महिलाओं को तलाशने के लिए प्रचार-प्रसार किया। धीरे-धीरे प्रचार प्रसार बढ़ता गया और सीखने वाले बढ़ते गए।

महिलाओं को स्वावलंबी बनाना उद्देश्य
चांदनी का कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को केवल सिलाई सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी आजीविका के लिए सक्षम बनाना भी है। प्रशिक्षण पूरा होने पर महिलाओं को प्रमाण पत्र दिया जाता है। ताकि उन्हें अपने हुनर को काम में बदलने का अवसर मिलता है। प्रशिक्षित महिलाएं घर से ही सिलाई का काम शुरू कर सकती हैं। वहीं, आगे बढ़ने की इच्छुक महिलाएं अपना प्रशिक्षण केंद्र संचालित कर दूसरी महिलाओं को भी हुनरमंद बनाने की राह चुन सकती हैं।

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