जलभराव से बंद हुई बच्चों की पढ़ाई तो स्कूल प्रबंधक ने खुद संभाला मोर्चा, बिना सरकारी मदद के बनाया 60 फीट लंबा पुल
सीतापुर के खरेहटी गांव में जलभराव के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित होने पर, एमए एलिमेंटरी एजुकेशनल स्कूल के प्रबंधक ने स्वयं 60 फीट लंबा अस्थायी पुल बनाया।

खरेहटी में लकड़ी के पुल से होकर स्कूल जा रहे बच्चे
HighLights
सीतापुर के खरेहटी गांव में जलभराव से स्कूल बंद।
प्रबंधक ने बच्चों के लिए 60 फीट का पुल बनाया।
बिना सरकारी मदद के बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित की।
संवाद सूत्र, सीतापुर। जब किसी समस्या का सरकारी तंत्र संज्ञान नहीं लेता तो लोग स्वयं के भरोसे समस्या निदान के लिए रास्ता बना लेते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण खरेहटी गांव में देखने को मिला है।
नदियों व बारिश के पानी से जब रास्ता अवरुद्ध हो गया, पढ़ाई ठप हो गई तो प्रबंधन ने स्वयं के प्रयास से बच्चों की सुविधा के लिए लकड़ी का छोटा पुल तैयार कर लिया।
मियांपुरवा-रसूलपुर मार्ग पर खरेहटी गांव में एमए एलिमेंटरी एजुकेशनल विद्यालय संचालित है। इसमें लगभग 200 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल तक जाने वाले रास्ते पर जलभराव हो गया है। ऐसे में बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुंचना मुश्किल हो गया। बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे थे।
एक बेंच की कीमत है 1500 रुपये
प्रबंधक अखिलेश कुमार ने बिसवां के तहसीलदार को लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया, समाधान नहीं हो सका। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। इस कारण आठ दिन तक विद्यालय बंद रहा। पानी उतरने में दो माह का समय लगेगा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा था।
12 बेंच को मिलाकर निकलने के लिए करीब 60 फीट लंबा अस्थाई पुल तैयार कर लिया है। इससे होकर बच्चे विद्यालय तक आसानी से पहुंच जाते हैं। आसपास अभी भी करीब तीन फीट तक पानी भरा है।
इसे तैयार कराने में चार दिन लगे। एक बेंच की कीमत 1500 रुपये है। कम पैसे में ही व्यवस्था हो गई। लेखपाल राम खेलावन ने बताया कि पानी सूख जाए तब रास्ते की समस्या का स्थाई समाधान करा दिया जाएगा।
