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संघर्ष से सफलता की नई इबारत, आभावों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर चमकीं सीतापुर की दो बेटियां

Published: Sat, 10 Oct 2026 07:50 PM (GMT+05:30)

सीतापुर की सोनाली ने योग में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया, वहीं तनिष्का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सोनाली ने योग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीती, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग।

  2. तनिष्का पाल ने ताइक्वांडो में स्वर्ण पदक हासिल किया।

  3. सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों ने खेल में बड़ी सफलता पाई।

विनीत पांडेय, सीतापुर। घर में सीमित लेकिन सपनों की बड़ी उड़ान। परिस्थितियां कदम रोकने की कोशिश करती रहीं, मगर हौसले ने हर बार उनको मात दे दी। जिले की दो बेटियां सोनाली और तनिष्का पाल ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर ऐसी ही मिसाल पेश की है, जो उन बच्चों के लिए प्रेरणा है, जिनके सपनों के आड़े कोई न कोई विसंगति आ जाती है। एक ने योग में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक का सफर तय किया तो दूसरी ने ताइक्वांडो में स्वर्ण पदक जीतकर अब अपने से छोटी खिलाड़ियों को हुनर सिखाने की जिम्मेदारी संभाल ली है।

श्रमिक पिता की बेटी सोनाली ने बनाई पहचान
खैराबाद के जूनियर हाईस्कूल मिश्रापुर की सोनाली ने बीते वर्ष कक्षा आठ में रहते हुए योग में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाई। सोनाली के पिता रामू श्रमिक हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी आसान नहीं है। ऐसे में खेल के लिए जरूरी संसाधन जुटाना और अभ्यास के लिए समय निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था।

फिर भी शिक्षिका नीलम व जिला खेल शिक्षक राज शर्मा के नेतृत्व में सोनाली ने मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मेहनत और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने राज्य स्तरीय योग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम बंगाल के दीघा में आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। अब वह कक्षा नौ में माध्यमिक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हो चुकी हैं।

मंदिर के बाहर फूल बेचती मां, बेटी ने जीता स्वर्ण
शहर की तनिष्का पाल की कहानी भी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की है। उनके पिता ललित श्रमिक हैं और मां सुमन पाल मंदिर के बाहर फूल बेचती हैं। परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद तनिष्का ने ताइक्वांडो में अपनी मेहनत जारी रखी। जीवन में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने लक्ष्य नहीं छोड़ा।कोच सुरेंद्र लाल के नेतृत्व में अभ्यास को जारी रखा। मेहनत रंग लाई और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया।अब वह अपने से जूनियर खिलाड़ियों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दे रही हैं।

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