सिसकियां, छलकती आंखें और अपनों के शव का इंतजार... सीतापुर के गांवों में पसरा मातम
गुजरात में हुए एक हादसे में सीतापुर के रामपुर मथुरा के पांच युवकों की मौत हो गई है। उनके परिजन ...और पढ़ें
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संवाद सूत्र, मथुरा (सीतापुर)। गुजरात में हुए हादसे ने पांच परिवारों की खुशियां छीन लीं है। रामपुर मथुरा के बिंद्रापुरवा के कुलदीप व संदीप, खनेवा के देशराज, पासिनपुरवा के अमित, हेकपुर के वीरेश की मौत हो गई है। शनिवार को इनके स्वजन सिसकियां भरते हुए छलकती आंखों से दरवाजे की तरफ टकटकी लगाए अपनों के शव आने का इंतजार करते रहे।
इस हादसे में किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी के सिर से परिवार का सहारा उठ गया है। गांवों में मातम पसरा है। परिजनों की आंखें अपनों के अंतिम दर्शन के लिए तरस रही हैं। हर किसी को गुजरात से शवों के गांव पहुंचने का इंतजार था। हादसे में किसी को अपूर्णीय क्षति तो किसी के लिए जिंदगी भर न भरने वाला जख्म मिला है।
हादसे की खबर के बाद से घरों में चीख-पुकार मची है। परिजनों को अब भी अपनों की मौत पर विश्वास नहीं हो रहा। गांव के लोग पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। सभी की निगाहें गुजरात से आने वाले शवों पर टिकी हैं, ताकि वे अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन कर सकें और अंतिम संस्कार कर सकें।
अधिकांश के बने थे जाब कार्ड
संदीप के पिता होली ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड बना था, जबकि बहू रेनू के नाम मनरेगा का जाब कार्ड बना है। गांव में भी काम मिलता था, लेकिन बाढ़ का पानी भरा होने के कारण काम बंद चल रहा है। पौत्र सचिन के इलाज में करीब पांच लाख का कर्ज हो गया था। इसे चुकाने के लिए संदीप करीब दो माह पहले गुजरात कमाने गया था। वहां से अधिक आमदनी होती।
कुलदीप की मां रामरानी ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड था, लेकिन जाब कार्ड नहीं था। गुजरात में आसानी से काम मिलता, अच्छा मेहनताना के चलते वह गुजरात चला गया था। देशराज के बेटे बबलू ने बताया कि पिता के नाम जाब कार्ड और श्रम कार्ड दोनों बने थे। अनिल की मां सीमा देवी ने बताया कि उनके बेटे के भी कार्ड बने हैं।
प्रशासन पीड़ित परिवारों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। शासन के निर्देशों की प्रतीक्षा की जा रही है। हरसंभव मदद की जाएगी।- सुधीर कुमार, उपजिलाधिकारी महमूदाबाद
