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सीतापुर में नदी की जमीन पर केशव ग्रीन सिटी बसाने वालों के खिलाफ FIR, रडार पर मददगार अधिकारी

Published: Sat, 17 Oct 2026 01:03 PM (IST)

FIR Against Builder in Sitapur: मुकेश अग्रवाल और उसके गैंग के खिलाफ सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में ...और पढ़ें

पेरई नदी में आई बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी डूबने से सैकड़ों परिवार बेघर, मुकेश अग्रवाल और पत्नी श्वेता

पेरई नदी में आई बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी डूबने से सैकड़ों परिवार बेघर, मुकेश अग्रवाल और पत्नी श्वेता

HighLights

  1. सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में बनी केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी की हुई जांच तो सामने आया फर्जीवाड़ा

  2. जांच के दायरे में सीतापुर में वर्ष 2016 से 2022 के बीच तैनात रहे अधिकारियों की भी भूमिका

  3. नदी के बहाव क्षेत्र में बसाई गई केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी, बारिश में कॉलोनी जलमग्न

जागरण संवाददाता, सीतापुर : जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान में बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर भूमाफिया मुकेश अग्रवाल और उसके गैंग के खिलाफ सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी बसाने के प्रकरण में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

सीतापुर के डीएम के निर्देश पर विनियमित क्षेत्र के जेई ने भूमाफिया मुकेश अग्रवाल, मुकेश की पत्नी श्वेता, पिता प्रह्लाद, भाई विकास और पूर्व सब रजिस्ट्रार की पत्नी रोली श्रीवास्तव सहित कई अन्य के खिलाफ एफआईआर हुई कराई है। इन सभी के खिलाफ लोगों को धोखा देने, षड्यंत्र करके जालसाजी करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के प्रकरण में एफआईआर कराई गई है।

जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने बताया कि कालोनी को बसाने में हर स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है। जांच चल रही है। जांच के दायरे में हर उस जिम्मेदार को रखा गया है, जिसने अनदेखी की है। रिपोर्ट का परीक्षण कर कार्रवाई होगी। यहां महायोजना के नियमों के विपरीत बिना लेआउट कॉलोनी बसाई गई और नदी की जमीन में बिल्डर ने मकान बनाकर बेचा।

FIR Keshav Green

केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी डूबने से सैकड़ों परिवार बेघर

पेरई नदी में आई बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी डूबने से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए। इसका संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने उच्चस्तरीय जांच कराई। इस जांच में पता चला कि नदी को नाला बताकर बिना लेआउट पास कराए कॉलोनी बनवा दी गई।

तत्कालीन सब रजिस्ट्रार की भी इसमें भूमिका मिली है। बाढ़ के पानी ने कालोनी की जमीन की हकीकत सामने ला दी है। जिन भूखंडों और मकानों को सुरक्षित आवासीय क्षेत्र बताकर बेचा गया, वहां पानी भरने से खरीदारों की मुश्किलें बढ़ गईं। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि नदी के बहाव क्षेत्र को नाला बताकर प्लाटिंग कराने में किस-किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।

Keshav puram

प्लाटिंग करने वालों के साथ अन्य पर भी कार्रवाई तय

सीतापुर में सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में प्राकृतिक जलधारा को नाला बताकर बसाई गई कालोनी का मामला अब सिर्फ प्लाटिंग करने वालों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेगा। बारिश और बाढ़ में कालोनी के जलमग्न होने के बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।

जमीन की खरीद-फरोख्त, कालोनी की बसावट और लोगों को प्लाट व मकान बेचने वालों के साथ उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है, जिनकी निगरानी में मानचित्र स्वीकृत हुए, भू-उपयोग बदला गया या निर्माण गतिविधियां संचालित होती रहीं।

वर्ष 2016 से 2022 के बीच केशव ग्रीन सिटी कालोनी से जुड़े मानचित्र, भू-उपयोग, स्वीकृतियां और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई है। यह भी देखा जा रहा है कि जिस क्षेत्र में प्राकृतिक जलधारा मौजूद थी, वहां आवासीय गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों ने मौके पर जाकर क्या जांच की थी।

जांच में यदि मानचित्र स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन या निगरानी में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो वर्ष 2016 से 2022 के बीच संबंधित पदों पर तैनात रहे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे में कार्रवाई की आंच इस दौरान तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी सदर, विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता, सिंचाई विभाग के अभियंता और संबंधित लेखपाल पर भी आ सकती है।

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