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केशव ग्रीन सिटी मामला: सीतापुर में नदी की जमीन में बसाई कॉलोनी, अब अधिकारियों की जवाबदेही भी होगी तय

Published: Mon, 05 Oct 2026 05:23 PM (IST)

सीतापुर में सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में बनी केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी के जलमग्न होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी नदी बहाव क्षेत्र में बनी।

  2. बारिश में कॉलोनी जलमग्न, प्रशासन ने जांच शुरू की।

  3. 2016-2022 के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में।

संवाद सूत्र, सीतापुर। सरायन और पिरई नदी के बहाव क्षेत्र में प्राकृतिक जलधारा को नाला बताकर बसाई गई कालोनी का मामला अब सिर्फ प्लाटिंग करने वालों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेगा। बारिश और बाढ़ में कालोनी के जलमग्न होने के बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।

जमीन की खरीद-फरोख्त, कालोनी की बसावट और लोगों को प्लाट व मकान बेचने वालों के साथ उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है, जिनकी निगरानी में मानचित्र स्वीकृत हुए, भू-उपयोग बदला गया या निर्माण गतिविधियां संचालित होती रहीं।

UP jimmedari

जिलाधिकारी डा. राजा गणपति आर. ने सिटी मजिस्ट्रेट से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद से सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। वर्ष 2016 से 2022 के बीच केशव ग्रीन सिटी कालोनी से जुड़े मानचित्र, भू-उपयोग, स्वीकृतियां और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

विभाग ने मौके पर की जांच

यह भी देखा जा रहा है कि जिस क्षेत्र में प्राकृतिक जलधारा मौजूद थी, वहां आवासीय गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों ने मौके पर जाकर क्या जांच की थी।

बाढ़ के पानी ने कालोनी की जमीन की हकीकत सामने ला दी है। जिन भूखंडों और मकानों को सुरक्षित आवासीय क्षेत्र बताकर बेचा गया, वहां पानी भरने से खरीदारों की मुश्किलें बढ़ गईं। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि नदी के बहाव क्षेत्र को नाला बताकर प्लाटिंग कराने में किस-किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।

जांच के दायरे में 2016 से 2022 के बीच तैनात रहे अधिकारी

जांच में यदि मानचित्र स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन या निगरानी में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो वर्ष 2016 से 2022 के बीच संबंधित पदों पर तैनात रहे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे में कार्रवाई की आंच इस दौरान तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी सदर, विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता, सिंचाई विभाग के अभियंता और संबंधित लेखपाल पर भी आ सकती है।

कालोनी को बसाने में हर स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है। जांच चल रही है। जांच के दायरे में हर उस जिम्मेदार को रखा गया है, जिसने अनदेखी की है। रिपोर्ट का परीक्षण कर कार्रवाई होगी। -डॉ. राजा गणपति आर. जिलाधिकारी