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यूपी बोर्ड टॉपर श्रेया बनी सिद्धार्थनगर की डीएम, बेटी को कुर्सी पर बैठा देख पिता ने बताई असली खुशी

Published: Sun, 18 Oct 2026 05:26 PM (IST)

यूपी बोर्ड दसवीं की टॉपर श्रेया मिशन शक्ति के तहत सिद्धार्थनगर की एक दिन की जिलाधिकारी बनीं। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों ...और पढ़ें

कलेक्ट्रेट सभागार में एक दिन की जिलाधिकारी बनी श्रेया पांडेय के साथ डीएम शिवशरणप्पा जीएन दाएं। जागरण

कलेक्ट्रेट सभागार में एक दिन की जिलाधिकारी बनी श्रेया पांडेय के साथ डीएम शिवशरणप्पा जीएन दाएं। जागरण

HighLights

  1. श्रेया यूपी बोर्ड दसवीं में प्रदेश में छठवें स्थान पर रहीं।

  2. मिशन शक्ति के तहत सिद्धार्थनगर की एक दिन की डीएम बनीं।

  3. उनका सपना सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना है।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में प्रदेश में छठा और जिले में पहला स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्रा श्रेया शुक्रवार को जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठीं। मिशन शक्ति के तहत उन्हें एक दिन का जिलाधिकारी बनाया गया।

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस दौरान उन्हें प्रशासनिक दायित्वों का अनुभव कराया। सामने जिले के अधिकारी और जनसमस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी थी। सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाली श्रेया के लिए यह पल खास रहा।

बांसी विकास खंड के पचहरी गांव की निवासी श्रेया के सामने बांसी क्षेत्र के केसवार गांव के रामनरेश केवट ने भूमि विवाद से जुड़ी समस्या रखी। श्रेया ने प्रार्थना पत्र उप जिलाधिकारी, बांसी को भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मेधा के दम पर प्रदेश में छठा स्थान

श्रेया ने इसी वर्ष उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की दसवीं की परीक्षा में प्रदेश में छठा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने रघुबर प्रसाद जायसवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से दसवीं की पढ़ाई पूरी की। वह वर्तमान में बुद्ध विद्यापीठ इंटर कॉलेज, बर्डपुर में कक्षा 11 की छात्रा हैं।

श्रेया ने बताया कि बचपन से उनका लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर देश की सेवा करना है। इसके लिए वह अभी से पढ़ाई और तैयारी पर विशेष ध्यान दे रही हैं। वह अपने लक्ष्य को हासिल कर समाज और देश के विकास में योगदान देना चाहती हैं।

बेटी की उपलब्धि से माता-पिता गदगद

श्रेया के पिता कृष्णनाथ पाण्डेय रघुबर प्रसाद जायसवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में संस्कृत के अध्यापक हैं। बेटी को जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठा देखकर वह भावुक और उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि असली खुशी उस दिन होगी, जब उनकी बेटी सचमुच जिलाधिकारी बनकर इस कुर्सी पर बैठेगी। मां अनीता पाण्डेय भी बेटी की उपलब्धि से प्रसन्न हैं और चाहती हैं कि श्रेया प्रशासनिक अधिकारी बनकर देशसेवा करे।

विद्यालय के प्रधानाचार्य बसंत मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में छठा स्थान पाकर श्रेया ने विद्यालय का नाम रोशन किया है। एक दिन के लिए जिलाधिकारी बनने का अवसर उसकी प्रतिभा और उपलब्धि का सम्मान है। इससे दूसरे विद्यार्थियों को भी मेहनत और लगन से लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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