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साइक्लोन Arnab के असर से सिद्धार्थनगर में बूंदाबांदी, खेतों में खड़ी धान की फसल को लेकर किसान परेशान

Published: Fri, 30 Oct 2026 04:55 PM (IST)

चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण सिद्धार्थनगर में हुई बूंदाबांदी से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

97% धान की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है

97% धान की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है

HighLights

  1. चक्रवाती तूफान अर्नब का सिद्धार्थनगर के मौसम पर असर।

  2. 97% धान की फसल खेतों में, कटाई में देरी।

  3. वर्षा से रबी की बुवाई और उत्पादन पर खतरा।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। चक्रवाती तूफान अर्नब का असर जिले के मौसम पर साफ दिखा। गुरुवार से आसमान में बादल छाए रहे। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई हल्की वर्षा और बूंदाबांदी देर शाम तक जारी रही। तापमान गिरने से गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है, लेकिन मौसम के इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

जिले में इस बार करीब 1.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार लगभग 97 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। सितंबर में हुई मूसलाधार वर्षा के बाद खेतों में नमी और कई स्थानों पर जलभराव बना हुआ है। इस कारण धान की कटाई समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब दोबारा वर्षा से खेतों के सूखने और कटाई में और देरी की आशंका है।

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कटाई में विलंब से रबी की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। समय पर धान न कटने से गेहूं की बोआई का निर्धारित समय प्रभावित होने और आगामी फसल के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। राहत यह रही कि हवा की गति बहुत तेज नहीं थी। कहीं-कहीं तेज झोंकों से खड़ी फसल गिरी, पर जिले के अधिकतर हिस्सों में हवा का व्यापक प्रभाव नहीं दिखा।

खेत में उतरकर खुद काट रहे धान

बिजौरा क्षेत्र के गागापुर गांव में युवा किसान विशाल शुक्ल शुक्रवार को मौसम की परवाह किए बिना पकी धान की फसल काटते दिखे। घने बादलों के बीच रुक-रुककर बूंदाबांदी हो रही थी और सितंबर की वर्षा का पानी खेतों से पूरी तरह नहीं निकला था। मजदूरों की प्रतीक्षा के बजाय किसान खुद फसल समेटने में जुटे हैं। विशाल ने कहा, “इस मौसम में जितनी फसल बच जाए, वही बहुत है।”

क्षेत्र के अन्य किसान भी मौसम खुलने की प्रतीक्षा किए बिना उपलब्ध समय में कटाई पूरी करने में लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में लगातार नमी से धान की कटाई और अगली फसल की तैयारी, दोनों प्रभावित हो सकती हैं। किसानों को मौसम खुलते ही जल्द कटाई पूरी करने की चिंता है।

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