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सिद्धार्थनगर में नशीले इंजेक्शन लगाकर नाबालिग से दुष्कर्म, दो सगे भाइयों को उम्रकैद

Published: Sat, 17 Oct 2026 08:01 AM (IST)

सिद्धार्थनगर में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और नशीले इंजेक्शन देने के मामले में दो सगे भाइयों ...और पढ़ें

आरकेस्ट्रा में नाचने और दुष्कर्म करने के लिए नाबालिग के लिए लगाते थे नशीला इंजेक्शन। जागरण

आरकेस्ट्रा में नाचने और दुष्कर्म करने के लिए नाबालिग के लिए लगाते थे नशीला इंजेक्शन। जागरण

HighLights

  1. नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो भाइयों को सजा।

  2. विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई शेष जीवनकाल तक उम्रकैद।

  3. नशीले इंजेक्शन देकर किया गया था शारीरिक शोषण।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। आर्केस्ट्रा में काम कराने के नाम पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर लाने, नशीले इंजेक्शन लगाने और सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट वीरेंद्र कुमार की न्यायालय ने शुक्रवार को दो सगे भाइयों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 65-65 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता की आयु और उसके साथ किए गए कृत्य को देखते हुए कठोर दंड दिया है।

न्यायाधीश ने निर्णय में कहा कि तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दोषियों ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर, डरा-धमकाकर और शादी का झांसा देकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा तथा उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बालिका के साथ हुआ यह जघन्य अपराध उसके मन और मस्तिष्क पर गहरा आघात पहुंचाने वाला है।

न्यायालय का कर्तव्य है कि अपराध की प्रकृति, उसे अंजाम देने के तरीके और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समुचित दंड दे, जिससे न्याय के उद्देश्य की पूर्ति हो सके। अभियोजन के अनुसार, बदायूं की रहने वाली नाबालिग की मां ने चार नवंबर 2016 को गोल्हौरा थाने में तहरीर दी थी।

आरोप लगाया कि बरेली निवासी राजेश और हरदोई के बेहटा क्षेत्र के मझौला गांव निवासी मनोज व रिंकू उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर करीब दो माह पहले अपने साथ ले गए थे। तीनों ने सिद्धार्थनगर के तिवारीपुर चौराहे के पास किराये पर कमरा लिया और बालिका को वहां रखा। मनोज आर्केस्ट्रा चलाता था।

आरोप था कि नाबालिग से जबरन नाच-गाना कराया जाता था और तीनों उसका शारीरिक शोषण करते थे। उसे नशीले इंजेक्शन भी लगाए जाते थे। रिंकू से विवाह कराने का झांसा देकर उसे अपने चंगुल में रखा गया। मौका मिलने पर पीड़िता ने मोबाइल से अपनी मां को फोन कर ठिकाने और आपबीती की जानकारी दी।

चिकित्सकीय परीक्षण में पीड़िता के शरीर पर कई जगह इंजेक्शन लगाने के निशान मिले। आंतरिक परीक्षण में भी चोटों का उल्लेख किया गया। अभियोजन ने पीड़िता, उसकी मां और चिकित्सकीय साक्ष्यों सहित गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए।

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विवेचना के बाद राजेश का नाम आरोपपत्र से हटा दिया गया, जबकि मनोज और रिंकू के विरुद्ध मुकदमा चला।विशेष लोक अभियोजक पवन कुमार पाठक ने पीड़िता का पक्ष रखा। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने मनोज और रिंकू को दोषसिद्ध ठहराते हुए कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

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