सिद्धार्थनगर पोस्टमार्टम हाउस में नहीं हैं मशीन, आंखों से होता है शव का वजन
सिद्धार्थनगर पोस्टमार्टम हाउस में शवों का वजन करने वाली मशीन न होने से चिकित्सकों को अंदाजे से काम चलाना पड़ता ...और पढ़ें

पोस्टमार्टम हाउस में केवल बच्चों के शव का हो रहा वजन। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
सिद्धार्थनगर पोस्टमार्टम हाउस में शव वजन मशीन का अभाव।
अंदाजे से वजन दर्ज होने से पुलिस विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं।
सही वजन न मिलने से न्यायिक साक्ष्य जुटाने में दिक्कत।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। पोस्टमार्टम हाउस में आने वाले शव का वजन करने वाली मशीन नहीं हैं। यहां पर कार्यरत चिकित्सक व कर्मचारी आंखों से अंदाजा लगाकर शव के वजन का माप करते हैं। जबकि पोस्टमार्टम के समय शरीर की लंबाई नापने के साथ वजन का तौल कराना आवश्यक है। जबकि पोस्टमार्टम हाउस में केवल बच्चों के शव के वजन करने की मशीन उपलब्ध है।
इसमेंं अधिकतम 15 किलो तक का ही वजन किया जा सकता है। इससे पुलिस की विवेचना भी प्रभावित हो जा रही है। न्यायालय में भी पुलिस को अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध कराने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पोस्टमार्टम हाउस में वजन करने की मशीन नहीं होने से पुलिस की विवेचना प्रभावित होने लगा है। यहां पर केवल अंदाजा लगाते हुए वजन दर्ज किया जाता है। कई बार पुलिस को अपनी विवेचना में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पोस्टमार्टम हाउस में प्रतिदिन औसत दो से तीन शव का पोस्टमार्टम होता है। लेकिन आधा-अधूरा पोस्टमार्टम होने के कारण सही तरीके से जांच नहीं हो पा रही है।
केस एक
बांसी कोतवाली के जनियाजोत गांव में 20 सितंबर को विवाह के बाद देर रात नवविवाहित का शव उनके कमरे में मिला था। पति फंदे पर लटकता और पत्नी का शव फर्श पर पड़ा था। फर्श पर पत्नी के शव के पास ही स्टोल (महिलाओं का हल्के गर्म कपड़े की ओढ़नी) से बना फंदा पड़ा मिला। पत्नी की लंबाई पांच फीट रही और वजन 45 से 50 किलो लिखा गया। लेकिन सही वजन नहीं मिलने के कारण पुलिस परेशान हो गई है। वह इसका निर्णय नहीं कर पा रही है कि स्टोल के फंदे को काट कर शव को नीचे उतारा गया था कि कपड़ा फटने के कारण वह नीचे गिर गई थी।
केस दो
जोगिया थाना के सोनवल गांव के तालाब में एक दवा कंपनी के एमआर (मार्केटिंग रिप्रजेंटिव) का शव पानी में डूबा मिला था। पानी में काफी दिन डूबे रहने के कारण शव क्षत-विक्षत होने की कगार पर पहुंच गया था। पुलिस ने जब इसका पोस्टमार्टम कराया तो उसका सही वजन नहीं किया जा सका। जिसके कारण पुलिस को विवेचना में यह नहीं ज्ञात हो सका कि वह कितने दिन पुराना है। शव के वजन, शरीर के चमड़ी और मांसपेशियों के फूलने के आधार पर कितने दिन पुराना होने का अवधि निकालने की चिकित्सा विज्ञान में विधि बताई गई है। अब दिन ज्ञात नहीं होने की स्थिति में पुलिस परेशान है।
