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सिद्धार्थनगर में पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन का बड़ा खेल, राजस्व को लग रहा भारी चूना

Published: Sun, 18 Oct 2026 12:55 PM (IST)

सिद्धार्थनगर में नेपाल सीमा से सटे इलाकों में पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग से जमीन की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं सामने ...और पढ़ें

सौ रुपये के स्टांप पर अधिकार पत्र देकर जमीन का कब्जा सौंपने का आरोप। सांकेतिक तस्वीर

 सौ रुपये के स्टांप पर अधिकार पत्र देकर जमीन का कब्जा सौंपने का आरोप। सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. नेपाल सीमा पर पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग।

  2. सौ रुपये के स्टांप पर जमीन के कब्जे का आरोप।

  3. राजस्व चोरी और सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त में पावर आफ अटार्नी यानी अधिकार पत्र का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि जमीन की वास्तविक खरीद-बिक्री के स्थान पर महज सौ रुपये के स्टांप पर अधिकार पत्र तैयार कर कब्जा सौंप दिया जाता है।

इससे न केवल स्टांप शुल्क और आयकर की चोरी की आशंका है, बल्कि जमीन खरीदने वालों की पहचान और लेनदेन की वास्तविक स्थिति पर भी सवाल खड़े होते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय हैं।

जिले की पांचों तहसीलों में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक 9459 लोगों ने जमीन का बैनामा कराया। इस अवधि में प्रशासन की जांच के दौरान स्टांप शुल्क की चोरी से जुड़े पांच मामले सामने आए। इन मामलों में संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि, इन आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी मामलों का संबंध पावर आफ अटार्नी से है, लेकिन जमीन के लेनदेन में नियमों के पालन और राजस्व की निगरानी का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

चार वर्ष पहले खुनुवा बाजार में उठा था मामला
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के खुनुवा बाजार में वर्ष 2022 में पावर आफ अटार्नी के माध्यम से जमीन के लेनदेन का मामला सामने आया था। उस समय स्थानीय लोगों ने तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक मीणा से सौ रुपये के स्टांप पर भूखंड बेचने की शिकायत की थी। प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराई और नो मैंस लैंड के पास हो रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया था।

जांच में सामने आया था कि नो मैंस लैंड से सटे क्षेत्र में बंजर और परती भूमि थी, जहां साप्ताहिक बाजार लगती थी। आरोप था कि एक व्यक्ति ने करीब सवा बीघा भूमि का एक करोड़ रुपये में बैनामा कराया और वहां आवासीय कालोनी विकसित कर भूखंडों की बिक्री शुरू कर दी।

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जांच में यह भी बात सामने आई थी कि भारतीय नागरिकों ने जमीन का बैनामा कराया, जबकि नेपाली नागरिकों को सौ रुपये के स्टांप पर पावर आफ अटार्नी के माध्यम से कब्जा दिए जाने की बात सामने आई थी। तत्कालीन एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव ने मामले की जांच की थी।

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भूमि की खरीद के संबंध में स्टांप शुल्क की देयता की नियमित जांच कराई जाती है। कहीं कोई मामला सामने आने पर उसकी जांच कराई जाएगी। अनियमितता मिलने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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-शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी