सिद्धार्थनगर में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 117 हेक्टेयर भूमि चिह्नित, यूपीसीडा को भेजा गया ब्योरा
सिद्धार्थनगर में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए सिरवत गांव के पास 117 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। जिला प्रशासन ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सिद्धार्थनगर में 117 हेक्टेयर भूमि चिह्नित।
औद्योगिक क्षेत्र के लिए यूपीसीडा को ब्योरा भेजा।
स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। जिले में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की दिशा में भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। सनई-शोहरतगढ़ मार्ग पर सिरवत गांव के पास कुल 117 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। जिला प्रशासन ने इसका ग्रामवार और गाटावार विवरण उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को भेज दिया है। अब उपलब्ध भूमि के ब्योरे के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना से जुड़ी आगे की प्रक्रिया बढ़ने की उम्मीद है।
भू-राजस्व मानचित्र के साथ मांगा था विवरण
उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ की ओर से तैयार कराई गई आख्या अपर जिलाधिकारी न्यायिक एवं विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डॉ. ज्ञानप्रकाश को भेजी गई थी। यह कार्रवाई विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के 20 अगस्त 2026 के पत्र के क्रम में की गई। इसमें सनई-शोहरतगढ़ मार्ग पर सिरवत गांव के पास चिह्नित भूमि का भू-राजस्व मानचित्र तैयार कराने के साथ ग्रामवार और गाटावार विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया था।
साथ ही ग्रामसभा, परती, बंजर और शासकीय व अर्द्धशासकीय संस्थाओं की रिक्त भूमि को चिह्नित कर उसका ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने भूमि संबंधी विवरण संकलित कर सोमवार को जिलाधिकारी के माध्यम से यूपीसीडा को भेजा है। इससे पहले यूपीसीडा की टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया था।
टीम ने भूमि की स्थिति, पहुंच और औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया। सिरवत के पास उपलब्ध भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपयुक्त माना गया था। अब भूमि का विवरण मिलने के बाद प्राधिकरण को उपलब्ध क्षेत्रफल, स्वामित्व और अन्य जरूरी पहलुओं के परीक्षण में मदद मिलेगी।
400 एकड़ से अधिक भूमि की आवश्यकता
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मचंद्र के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए 400 एकड़ से अधिक भूमि की आवश्यकता है। ऐसे में चिह्नित 117 हेक्टेयर भूमि परियोजना की प्रारंभिक तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, आवश्यक भूमि की उपलब्धता, उसकी दर और अधिग्रहण की स्थिति का परीक्षण होना बाकी है। इन पहलुओं पर आगे की कार्रवाई के बाद ही परियोजना का स्वरूप स्पष्ट हो सकेगा।
जिले में बड़े उद्योगों की कमी के कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से निवेश के साथ विनिर्माण, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और किसानों को अपनी उपज के विपणन के लिए नए विकल्प मिलने की उम्मीद है। सांसद जगदंबिका पाल भी जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं।
