सिद्धार्थनगर में सचिव की ID से नौ माह में बने 686 जन्म प्रमाणपत्र, दर्ज हुआ मुकदमा
सिद्धार्थनगर के खेसरहा ब्लॉक में एक सचिव की आईडी से नौ महीने में 686 जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए, जिनमें अनियमितता ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
सचिव की आईडी से नौ माह में 686 प्रमाणपत्र जारी।
मोबाइल गुम होने के बाद भी जारी होते रहे जन्म प्रमाणपत्र।
अनियमितता की आशंका पर अब मुकदमा दर्ज, जांच जारी।
जागरण संवाददाता, बांसी, (सिद्धार्थनगर)। खेसरहा ब्लाक की तीन ग्राम पंचायतों में सचिव की आइडी से नौ महीने में 686 जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए। इनमें अनियमितता की आशंका सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है। सचिव का मोबाइल दो मई को गायब हो गया था।
उन्होंने इसकी प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बाद भी उनकी आइडी से प्रमाणपत्र जारी होते रहे। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से पत्र मिलने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने सचिव को मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया। करीब 20 दिन तक टालमटोल के बाद शुक्रवार को चेतावनी दिए जाने पर सचिव ने खेसरहा थाने में तहरीर दी।
सीआरएस पोर्टल के अभिलेखों के अनुसार, एक जनवरी से 28 सितंबर तक मदरहना ग्राम पंचायत में 161, बकैनिहा में 259 और केशवार में 266 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए। इस तरह तीनों ग्राम पंचायतों में कुल 686 प्रमाणपत्र बने। इनमें कितने प्रमाणपत्र नियमों के विपरीत जारी हुए, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ग्राम विकास अधिकारी विशाल सोनकर के अनुसार, मोबाइल गायब होने के बाद उन्होंने अपने पिता के मोबाइल में अपना सिम डालकर प्रमाणपत्र जारी करने का काम जारी रखा। उनका कहना है कि मोबाइल गायब होने के कारण वह यह नहीं बता पा रहे हैं कि इस दौरान उनकी आइडी का दुरुपयोग कर कितने प्रमाणपत्र जारी किए गए।
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आइडी के दुरुपयोग पर नहीं दिया ध्यान
मोबाइल गायब होने की जानकारी होने के बाद भी आइडी के दुरुपयोग की आशंका पर समय रहते कदम नहीं उठाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि सचिव पिता के मोबाइल से प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे तो अपनी आइडी से जारी प्रमाणपत्रों की निगरानी क्यों नहीं की गई? इसकी भी जांच जरूरी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से पत्र मिलने के बाद सचिव को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। करीब 20 दिन तक कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को एडीओ पंचायत को चेतावनी दी गई कि सचिव मुकदमा नहीं दर्ज कराते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई कराई जाए। इसके बाद तहरीर दी गई। अब जांच से प्रमाणपत्रों में अनियमितता और आइडी के दुरुपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
