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सिद्धार्थनगर का परसोहिया सदानंद गांव, बलरामपुर पर निर्भर; बाढ़ और कटान से जूझता जीवन

Published: Sat, 03 Oct 2026 01:08 PM (IST)

परसोहिया सदानंद गांव, सिद्धार्थनगर जिले का एक ऐसा हिस्सा है जो नदियों की कटान से अलग होकर बलरामपुर जिले के ...और पढ़ें

पानी से होकर रोजमर्रा का सामान लेने जाते ग्रामीण- जागरण

पानी से होकर रोजमर्रा का सामान लेने जाते ग्रामीण- जागरण

HighLights

  1. परसोहिया सदानंद गांव नदियों की कटान से अलग-थलग पड़ा।

  2. मूलभूत सुविधाओं के लिए बलरामपुर जिले पर निर्भर ग्रामीण।

  3. हर साल चार माह बाढ़ से घिरा रहता है यह गांव।

अनिल द्विवेदी, भवानीगंज। सिद्धार्थनगर जिले के आखिरी छोर पर बसा एक गांव जो नदियों की कटान से अलग हो गया, गांव के चारो तरफ बलरामपुर जिला लगता है। रोज मर्रा की चीजें, बिजली, पढ़ाई, स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ना मिलने से ग्रामीण बलरामपुर जिले पर आश्रित है। हर वर्ष बाढ़ से घिरा यह गांव चार माह तक जान जोखिम में डाल कर स्टीमर से शादी ब्याह, महिला की डिलेवरी, बच्चों की पढ़ाई के लिए आना जाना पड़ता है। गांव में समुचित विकास, सड़क, पुल आदि के लिए ग्रामीण सिद्धार्थनगर जिले के नेताओं व अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक गए हैं।

क्षेत्र के परसोहिया सदानंद गांव की आबादी करीब 1400 है। तहसील मुख्यालय डुमरियागंज से यह 24 किमी दूर है। भड़रिया होते हुए बलरामपुर जिले के रसूलाबाद, महुआ, बांक मलमलिया होते हुए वहां जाना पड़ता है जबकि बरसात में उतरौला मुख्य मार्ग से गांव तक नाव ही एकमात्र सहारा बनता है। इस गांव का ब्लाक भनवापुर, विधानसभा इटवा और थाना त्रिलोकपुर पड़ता है।

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राप्ती नदी के किनारे बसा यह गांव कटान से अलग होकर बलरामपुर जिले की तरफ आ गया। बाढ़ से बचने के लिए बलरामपुर प्रशासन ने बलरामपुर भड़रिया तटबंध के नाम से 62 किमी तक बांध बनवा दिया। बांध से होकर परसोहिया सदानंद गांव के लोग डुमरियागंज, त्रिलोकपुर, इटवा आते जाते थे, पिछले आठ वर्षों से बांध कट गया लेकिन प्रशासन ने इसकी सुधि नहीं ली।

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हालत यह है कि बरसात में बाढ़ से यह गांव चारों तरफ से जलमग्न हो जाता है जो करीब तीन से चार माह तक रहता है। इस दौरान गांव में शादी हो या रोज मर्रा की चीजें, बच्चों का स्कूल, स्वास्थ्य सुविधा के लिए जान जोखिम में डाल कर स्टीमर से आना जाना पड़ता है। स्टीमर भी चंदे के तेल से चलता है। गांव में प्राथमिक विद्यालय है जहां 101 बच्चों का नामांकन है, शिक्षा पूरी करने के बाद बलरामपुर जिले के सरकारी, प्राइवेट स्कूलों में नाम लिखवाना पड़ता है।

  • सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधि हमारे गांव की समस्याओं को दूर नहीं कर सकते तो इस गांव को बलरामपुर जिले में जोड़ दें जिससे गांव को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके। - रामतीरथ
  • बाढ़ से घिरे गांव के लोगों को गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने व मोबाइल चार्ज करने के लिए दूर बलरामपुर जिले में भेजना पड़ता है। गर्मियों में अगर गांव में आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती है। - निर्मला देवी
  • हमारे गांव में एक ही फसल गेहूं अगर अगलगी नहीं हुई तो पैदा हो जाता, घान की फसल बाढ़ से खराब हो जाती है, हमारे गांव को बाढ़ से निजात कब मिलेगा इसका पता नहीं, अधिकारी दूर से ही मुआयना करके चले जाते हैं। - चंद्रिका प्रसाद
  • पत्राचार के माध्यम से जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों को गांव की स्थिति के बारे में अवगत कराया हैं, लेकिन अभी तक किसी की नजर इस गांव पर नहीं पड़ी। -जय प्रकाश, प्रधान प्रतिनिधि परसोहिया सदानंद

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