164.28 टन का वॉयलर लादकर सिद्धार्थनगर पहुंचा 250 पहियों वाला महाट्रक, बेल्जियम से लेकर आया 41 मीटर लंबा संयंत्र
बेल्जियम से आया 164.28 टन वजनी विशाल औद्योगिक उपकरण लखीमपुर खीरी के बायोप्लास्टिक संयंत्र के लिए सिद्धार्थनगर से गुजरा। इसे ...और पढ़ें

HighLights
बेल्जियम से 164.28 टन वजनी औद्योगिक उपकरण पहुंचा।
लखीमपुर खीरी के बायोप्लास्टिक संयंत्र के लिए।
महाट्रेलर देखने उमड़ी भीड़, विशेष इंतजाम किए गए।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। लखीमपुर खीरी के कुंभी में स्थापित हो रहे देश के पहले पालीलैक्टिक एसिड (पीएलए) आधारित बायोप्लास्टिक निर्माण संयंत्र के लिए बेल्जियम से मंगाया गया 164.28 मीट्रिक टन वजनी विशाल औद्योगिक उपकरण बुधवार को बस्ती के रास्ते हुए सिद्धार्थनगर पहुंचा। करीब 41 मीटर लंबे और 250 पहियों वाले महाट्रेलर को देखने के लिए रास्ते में जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी रही। बेवां चौराहे से होते हुए यह महाट्रेलर शाम तक बलरामपुर जिले की सीमा में प्रवेश कर गया।
विशालकाय उपकरण को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन को विशेष इंतजाम करने पड़े। रास्ते में बेवां सहित कई स्थानों पर पेड़ों की डालियों की छंटाई करानी पड़ी, ताकि उपकरण बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके। इसके अलावा मार्ग पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सतर्कता बरती गई। महाट्रेलर की लंबाई और ऊंचाई के कारण सड़क किनारे मौजूद अवरोधों को हटाना चुनौतीपूर्ण रहा।
तीन हजार करोड़ से अधिक की परियोजना
लखीमपुर खीरी के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की ओर से लगभग 3,080 करोड़ रुपये की लागत से संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यहां चीनी और उससे जुड़े अपशिष्ट पदार्थों से पीएलए आधारित बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा। इससे देश में बायोप्लास्टिक का घरेलू उत्पादन बढ़ने और आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
सुरक्षित आवागमन के लिए समन्वय
अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि भारी उपकरण के सुरक्षित आवागमन के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
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रास्ते में जहां पेड़ों की डालियां बाधा बन रही थीं, वहां उनकी छंटाई कराई गई। बेवां के रास्ते महाट्रेलर को सुरक्षित बलरामपुर जिले की सीमा तक पहुंचाया गया।
