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सिद्धार्थनगर में लगातार दूसरे साल चक्रवाती तूफान से किसान बेहाल, धान के बाद अब गेहूं की बुवाई पर संकट

Published: Sun, 01 Nov 2026 04:49 PM (IST)

लगातार दूसरे वर्ष चक्रवाती तूफान सिद्धार्थ नगर के किसानों के लिए मुसीबत बन गया है, जिससे धान की कटाई में देरी और गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है।

बेमौसम बारिश और जलजमाव के कारण फसलें खराब हो रही हैं।

बेमौसम बारिश और जलजमाव के कारण फसलें खराब हो रही हैं।

HighLights

  1. लगातार दूसरे वर्ष चक्रवाती तूफान से किसान परेशान।

  2. धान की कटाई में देरी, गेहूं बुवाई पर असर।

  3. बारिश से फसलें गिरीं, जलजमाव से नुकसान।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थ नगर। लगातार दूसरे वर्ष चक्रवाती तूफान किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। बेमौसम बारिश से धान की कटाई में देरी हो रही है और गेहूं की बोआई का समय भी आगे खिसकने की आशंका है। वर्ष 2025 में अक्टूबर के अंत में चक्रवाती तूफान का असर तीन से चार दिन रहा था। इस बार 28 अक्टूबर से शुरू हुआ प्रभाव पहली नवंबर तक दिखाई दिया। पिछले वर्ष 30 और 31 अक्टूबर को 23.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी, जबकि इस बार इन्हीं तारीखों में 39.2 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई।

पिछले वर्ष मोंथा तूफान के असर से किसान चिंतित हुए थे, जबकि इस बार अर्नब तूफान ने परेशानी बढ़ाई है। अभी पांच प्रतिशत भी धान की फसल नहीं कटी है। बारिश से खेतों में जलजमाव हो गया है, जिससे कटाई में देरी होगी। कुछ जगह तैयार धान की खड़ी फसल खेतों में गिर गई है और इससे नुकसान की आशंका है।

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कृषि विज्ञानियों के अनुसार गेहूं की बोआई के लिए 10 नवंबर से 10 दिसंबर तक का समय उपयुक्त रहता है। मौजूदा हालात में 10 नवंबर से धान की कटाई शुरू हो पाना मुश्किल है। कटाई में देरी होने पर गेहूं की बोआई भी पिछड़ेगी और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसान राम अवध, राधेश्याम, ठाकुर प्रसाद, शिव कुमार और रमेश ने कहा कि लगातार दूसरे वर्ष मौसम की मार से किसानों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसून सीजन के बाद चक्रवाती सीजन रहता है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में तूफान कभी भी सक्रिय हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में चक्रवाती तूफान आया था और इस बार भी इसी समय के आसपास उसका असर दिखा। ये तीनों महीने चक्रवाती तूफान के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।

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