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नेपाल जेल से फरार 18 भारतीय बंदी अब भी लापता, भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ी

Published: Mon, 14 Sep 2026 05:57 PM (IST)

नेपाल के बांके जिले की जेल से पिछले साल फरार हुए 340 बंदियों में से 169 अभी भी लापता हैं, जिनमें 18 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. नेपाल की बांके जेल से 18 भारतीय बंदी फरार।

  2. कुल 340 में से 169 बंदी अभी भी लापता हैं।

  3. भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। नेपाल के बांके जिले में पिछले वर्ष जेनजी आंदोलन के दौरान जेल और बाल सुधार गृहों से फरार हुए 340 बंदियों में 169 अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इनमें नौबस्ता क्षेत्रीय कारागार से फरार हुए 18 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

भारत-नेपाल सीमा से सटा बांके जिला होने के कारण इन भारतीय बंदियों का अब तक पता नहीं चलना सीमा क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी ऐसे फरार बंदियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

तीन संस्थानों से आंदोलन के दौरान बंदी फरार

नेपाल के रातोपाटी समाचार पोर्टल ने 25 भदौ 2083 (10 सितंबर 2026) को अपने डिजिटल संस्करण में इस संबंध में समाचार प्रकाशित किया है। इसके अनुसार बांके जिले के तीन संस्थानों से आंदोलन के दौरान बंदी फरार हुए थे। इनमें डुडुवा गांवपालिका स्थित जयन्दु बाल सुधार गृह, बैजनाथ गांवपालिका स्थित नौबस्ता बाल सुधार गृह और नौबस्ता क्षेत्रीय कारागार शामिल हैं।

जयन्दु बाल सुधार गृह से फरार 115 बाल बंदियों में 68 को पकड़ लिया गया है, जबकि 47 अब भी फरार हैं। नौबस्ता बाल सुधार गृह से 78 बाल बंदी भागे थे, जिनमें 47 पकड़े जा चुके हैं और 31 की तलाश जारी है।

झड़प में पांच बाल बंदियों की मृत्यु

आंदोलन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प में पांच बाल बंदियों की मृत्यु भी हुई थी। नौबस्ता क्षेत्रीय कारागार से 147 बंदी फरार हुए थे। कारागार प्रमुख दल बहादुर बस्नेत के अनुसार घटना के समय जेल में 585 बंदी निरुद्ध थे।

एक वर्ष के दौरान 56 फरार बंदियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 91 अब भी पुलिस के संपर्क से बाहर हैं। इनमें 18 भारतीय नागरिक बताए गए हैं। इस तरह तीनों संस्थानों से फरार 340 में 171 पकड़े जा चुके हैं और 169 की तलाश जारी है।

पिछले वर्ष सीमा पर पकड़े गए थे नौ बंदी

जेनजी आंदोलन के दौरान फरार बंदियों की तलाश में भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। उस समय सीमा क्षेत्र में नौ फरार बंदियों को पकड़कर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल पुलिस को सौंपा था।

इसके बाद भी 18 भारतीय बंदियों का एक वर्ष से पता नहीं चलना सीमा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। हालांकि सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सतर्क हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सीमा पर पुलिस पहले से सक्रिय है। संदिग्धों की तलाशी लेने के साथ उनसे पूछताछ भी की जा रही है। इसके लिए सीमाई क्षेत्र की पुलिस को विदेश निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की सक्रियता की देन है कि तस्करी की घटनाओं पर भी अंकुश लग रहा है।

-डाॅ. अभिषेक महाजन, पुलिस अधीक्षक

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