गन्ने के खेत में छिपे पांच बच्चे… साढ़े पांच घंटे बाद मिले, घरवालों ने पूछी वजह तो लिया मास्टरजी का नाम
शामली के जगनपुर गांव में पांच मासूम बच्चे स्कूल जाने में देरी होने पर प्रधानाचार्य के डर से गन्ने के ...और पढ़ें

कैराना के गांव जगनपुर से स्कूल जाते पांचों बच्चे। सौ. इंटरनेट मीडिया
HighLights
देरी से स्कूल पहुंचने पर प्रधानाचार्य के डर से बच्चे छिपे।
पांच मासूमों ने गन्ने के खेत में बिताए साढ़े पांच घंटे।
शामली के जगनपुर गांव में बच्चों के लापता होने से हड़कंप।
जागरण संवाददाता, शामली। कैराना के गांव जगनपुर से स्कूल के लिए निकले पांच मासूमों के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने से पूरे गांव में हलचल मच गई। गांव के लोग और स्कूल के शिक्षक बच्चों की तलाश में जुटे रहे। स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्चे गन्ने के खेत से निकले।
इस बीच अभिभावक उन्हें घर ले आए। बच्चों ने बताया कि स्कूल जाने में वह लेट हो गए थे। रास्ते में प्रधानाचार्य मिले और उन्होंने कहा कि जल्द स्कूल आओ, इस बात से बच्चे डर गए, उन्हें लगा कि स्कूल पहुंचते ही आज पिटाई होगी, इसलिए स्कूल नहीं जाते।
यह है पूरा मामला
कैराना क्षेत्र के गांव जगनपुर निवासी पांचवीं कक्षा के छात्र वैभव, नैतिक, अतुल, विधान और दूसरी कक्षा का छात्र वासु शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे जनता जूनियर हाईस्कूल कंडेला में पढ़ने के लिए एक साथ घर से निकले थे। रास्ते में पीछे से आ रहे स्कूल के प्रधानाचार्य ने बच्चों को देखकर कहा कि बहुत लेट हो चुके हो, जल्दी स्कूल पहुंचो।
प्रधानाचार्य के इतना कहते ही मासूमों के मन में डर बैठ गया कि लेट पहुंचने पर स्कूल में उनकी पिटाई होगी। इसी डर के कारण पांचों बच्चे स्कूल जाने के बजाय सीधे रास्ते में स्थित गन्ने के खेत में जाकर छिप गए। बच्चे दिनभर खेत में छिपे रहे और वहां कुरकुरे खाकर व कोल्डड्रिंक पीकर समय बिताते रहे।
जब दोपहर दो बजे स्कूल की छुट्टी की घंटी बजी, तो बच्चों को लगा कि अब घर जाने का सही समय है। जैसे ही पांचों बच्चे खेत से बाहर निकलकर घर की ओर लौटने लगे, तलाश में जुटे स्वजन और ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया और सुरक्षित पकड़ लिया। उधर, दो बजे तक बच्चों के घर न पहुंचने और स्कूल से भी गायब रहने के कारण दिनभर गांव में हलचल मची रही।
इन्होंने कहा-
बच्चों में शारीरिक दंड या सख्त डांट का भय बेहद नकारात्मक प्रभाव डालता है। जब बच्चे स्कूल या शिक्षकों से डरने लगते हैं, तो वे अपनी गलती छिपाने के लिए ऐसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं। अभिभावकों और शिक्षकों को चाहिए कि वे डर का माहौल बनाने के बजाय बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करें। यदि बच्चा लेट भी हो जाए तो उसे डांटने के बजाय समय का महत्व समझाएं, ताकि वे भयमुक्त होकर अपनी बात कह सकें।
-अरुणिमा मिश्रा, मनोवैज्ञानिक।
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