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स्कूल है या मजबूरी का ठिकाना? पांच धूर जमीन, बिहार के इस जिले में बेंच-डेस्क कमरों में; बच्चे बरामदे में

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:18 PM (IST)

गढ़पुरा के प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मोतरा में 124 बच्चे मात्र पांच धूर जमीन पर पढ़ रहे हैं, जिससे कमरों और खेल ...और पढ़ें

बेंच-डेस्क कमरों में, बच्चे बरामदे में

बेंच-डेस्क कमरों में, बच्चे बरामदे में

अरुण चन्द्र झा, गढ़पुरा (बेगूसराय)। सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के दावे के बीच गढ़पुरा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मोतरा की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। यहां महज पांच धूर जमीन पर 124 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा है।

जगह की कमी ऐसी कि पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को बरामदे में दरी बिछाकर पढ़ाया जाता है। विद्यालय में कमरों की कमी के साथ खेल के मैदान का भी अभाव है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है।

पांच धूर जमीन, दो कमरे और एक कार्यालय

मालीपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस विद्यालय का भवन कोरैय पंचायत की सीमा में स्थित है। उपलब्ध जमीन पर विद्यालय के दो छोटे वर्ग कक्ष और एक कार्यालय संचालित हैं।

सीमित परिसर के कारण अतिरिक्त कमरे बनाने की गुंजाइश भी नहीं के बराबर है। विद्यालय में 124 बच्चों के नामांकन की जानकारी दी गई है।

इनके पठन-पाठन के लिए प्रधानाध्यापक नवीन प्रकाश महतो सहित छह शिक्षक और दो टोला सेवक कार्यरत हैं। इसके बावजूद कमरों की कमी के कारण बच्चों को अलग-अलग जगह बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।

बेंच-डेस्क कमरों में, बच्चे बरामदे में

विद्यालय की सबसे बड़ी परेशानी पर्याप्त वर्ग कक्षों का नहीं होना है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को बरामदे में दरी बिछाकर पढ़ाया जाता है, जबकि दोनों वर्ग कक्षों में बेंच-डेस्क लगे हैं।

बरामदे में पढ़ाई होने से बच्चों को व्यवस्थित कक्षा जैसा माहौल नहीं मिल पाता। सीमित जगह के कारण विद्यालय में बच्चों के खेलने-कूदने के लिए मैदान भी उपलब्ध नहीं है। इससे पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए भी जगह की कमी बनी हुई है।

चहारदीवारी नहीं, सड़क किनारे शौचालय

विद्यालय भवन सड़क के किनारे स्थित है, लेकिन परिसर में चहारदीवारी नहीं है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

विद्यालय के बाहर सड़क किनारे दो शौचालय बनाए गए हैं। पेयजल के लिए समरसेबुल की व्यवस्था है। वहीं, कार्यालय और वर्ग कक्षों में बिजली तथा पंखे की सुविधा उपलब्ध है।

यानी कुछ बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन परिसर की सीमित जगह और सुरक्षा से जुड़ी कमियां अब भी बड़ी चुनौती हैं।

सड़क के गड्ढे में मिट्टी भरकर बनाया भोजन कक्ष

बच्चों के मध्याह्न भोजन की व्यवस्था के लिए भी जगह की कमी के बीच इंतजाम किया गया है। सड़क के गड्ढे में मिट्टी भराई कर एस्बेस्टस की छत वाला एक अतिरिक्त कमरा बनाया गया है, जहां बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।

विद्यालय की भौगोलिक स्थिति और जमीन का अभाव सुविधाओं के विस्तार में बाधा बन रहे हैं। अतिरिक्त कक्ष, खेल का मैदान और बेहतर परिसर जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्धता जरूरी है।

जमीन मिले तो सुधरे विद्यालय की सूरत

पांच धूर जमीन में संचालित इस विद्यालय की समस्याएं केवल कमरों तक सीमित नहीं हैं। बच्चों को व्यवस्थित कक्षाओं में पढ़ाने, सुरक्षित परिसर उपलब्ध कराने और खेलकूद के लिए जगह बनाने की जरूरत है।

मौजूदा जमीन पर इन सुविधाओं का विस्तार करना मुश्किल है। ऐसे में विद्यालय के समुचित विकास के लिए जमीन की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देना जरूरी है।

सवाल है कि 124 बच्चों की पढ़ाई से जुड़े इस विद्यालय की समस्याओं का समाधान कब होगा और इन्हें भी सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल कब मिल सकेगा?