पश्चिमी यूपी की सियासत में हलचल- क्या कांग्रेस का दामन थामेगा अमीर आलम परिवार? थानाभवन सीट पर टिकी निगाहें
पूर्व सांसद अमीर आलम खान का परिवार आजाद समाज पार्टी से अलग हो गया है, जिससे पश्चिमी यूपी की राजनीति ...और पढ़ें

HighLights
अमीर आलम परिवार ने आजाद समाज पार्टी से नाता तोड़ा।
कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में तेज।
थानाभवन विधानसभा सीट पर दावेदारी मुख्य कारण बनी।
जागरण, संवाददाता, शामली। पश्चिमी यूपी की राजनीति में चार दशकों से अधिक का मजबूत सियासी रसूख रखने वाले पूर्व सांसद अमीर आलम खान परिवार के आजाद समाज पार्टी (आसपा) से अलग होने के बाद राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है।
जनता दल, सपा, रालोद और बसपा का लंबा राजनीतिक सफर तय करने के बाद अब यह चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि पिता-पुत्र जल्द ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
सियासी जानकारों का दावा है कि यदि यह कयास हकीकत में बदलते हैं, तो शामली और कैराना के साथ-साथ वेस्ट के चुनावी समीकरण नए सिरे से बदल जाएंगे।
सीट पर दावेदारी की नहीं बनी सहमति
मुजफ्फरनगर और शामली के अमीर आलम परिवार ने वर्ष 2025 में इस उम्मीद के साथ आसपा का रुख किया था कि सपा के साथ पार्टी का मजबूत गठबंधन आकार लेगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर यह समीकरण स्पष्ट नहीं हो सका। इसके अलावा, थानाभवन विधानसभा सीट पर दावेदारी को लेकर भी पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पाई।
इस सीट पर एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जिसके चलते अमीर आलम परिवार यहां से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा था। जब सीटों के तालमेल पर बात नहीं बनी, तो इस परिवार ने आसपा से अलग होने का निर्णय लिया।
कांग्रेस के पाले में जाना सियासी मजबूरी
पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के पास फिलहाल कोई बड़ा और स्थापित मुस्लिम चेहरा नहीं है, जबकि सपा के पास पहले से ही जिले में नाहिद हसन और सांसद इकरा हसन के रूप में मजबूत आधार मौजूद है, वहीं रालोद के पास विधायक अशरफ अली खान, राव वारिश हैं।
आसपा से नाता तोड़ ही चुके है, ऐसे में कांग्रेस कोटे से थानाभवन सीट मिलने की संभावनाओं को देखते हुए यह परिवार कांग्रेस का रुख कर सकता है। यदि गठबंधन के तहत कांग्रेस को हर जिले में एक-एक सीटें मिलती हैं तो थानाभवन सीट पर अमीर आलम परिवार की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जाएगी।
