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RLD, BSP, SP और अब ASP से भी माेह भंग... पूर्व MP अमीर आलम व पूर्व MLA नवाजिश आलम के इस्तीफे की पूरी इनसाइड स्टोरी

By Anuj Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 18 Sep 2026 02:28 PM (IST)

पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने आजाद समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ...और पढ़ें

पूर्व सांसद अमीर आलम खान और पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान (फाइल फोटो)

पूर्व सांसद अमीर आलम खान और पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 से पहले सियासी उथल-पुथल हुई तेज

  2. आलम परिवार का पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर है प्रभाव

जागरण संवाददाता, शामली। जिले के पुराने सियासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने आजाद समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए नाता तोड़ने के इस ऐलान के बाद से ही क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है और पिता-पुत्र के अगले सियासी कदम पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। वहीं, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष का दावा है कि मुजफ्फरनगर व बुढाना सीटों के बाद थानाभवन पर भी दावेदारी की जा रही थी, जिस पर सहमति नहीं बनी। इस वजह से इस्तीफा दिया गया है।

जिले के कस्बा गढ़ीपुख्ता निवासी आलम परिवार का पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले चार दशकों से गहरा प्रभाव रहा है। पूर्व सांसद अमीर आलम खान (Ameer Alam Khan) का राजनीतिक इतिहास लंबा रहा है। वह वर्ष 1985 में थानाभवन सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद जनता दल के टिकट पर 1989 में मोरना और 1996 में थानाभवन से तीसरी बार विधानसभा पहुंचे।

उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1999 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व उप थल सेनाध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक को शिकस्त दी थी। वह राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। वहीं, उनके बेटे नवाजिश आलम खान (Nawazish Alam Khan) ने भी युवा राजनीति में अपनी मजबूत पैठ बनाई।

परिसीमन के बाद हुए चुनावों में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों में अपनी धमक दिखाई थी। हालांकि, समय के साथ इस परिवार ने कई राजनीतिक दलों का सफर तय किया। रालोद, बसपा और सपा के बाद यह परिवार बीते साल 2025 में चंद्रशेखर आजाद (MP Chandrashekhar Azad) की आजाद समाज पार्टी में शामिल हुआ था। गढ़ीपुख्ता में एक बड़ी जनसभा के दौरान उन्होंने आसपा की सदस्यता ग्रहण की थी, लेकिन महज कुछ ही समय बाद यह साथ भी छूट गया।

सीटों के बंटवारे और दावेदारी पर उपजा विवाद

आसपा से इस अलगाव के पीछे मुख्य वजह सीटों को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और तनातनी बताई जा रही है। पार्टी जिलाध्यक्ष अनुज भारती के मुताबिक, आजाद समाज पार्टी ने शुरुआती दौर में बुढ़ाना विधानसभा सीट पर आलम परिवार को हरी झंडी दे दी थी और बाद में मुजफ्फरनगर सीट पर भी सहमति बन गई थी। लेकिन पेच तब फंसा जब थानाभवन सीट पर पूर्व विधायक नवाजिश आलम की ओर से मजबूत दावेदारी पेश की जाने लगी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आसपा ने इस सीट पर पहले ही राव मौसम अली को प्रभारी नियुक्त किया हुआ है, जिसके चलते भीतरखाने सीटों के समीकरण और टिकट की जंग को लेकर भारी असंतोष पनप गया था।

थानाभवन सीट पर बिगड़ी बात

भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष प्रभात अनुज कुमार के अनुसार, पार्टी ने शुरुआती बातचीत में आलम परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा को देखते हुए बुढ़ाना विधानसभा सीट पर उनकी दावेदारी को हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद मुजफ्फरनगर सीट को लेकर भी पार्टी के भीतर सहमति बन गई थी लेकिन पेच तब फंसा जब पूर्व विधायक नवाजिश आलम की ओर से थानाभवन सीट पर मजबूत दावेदारी पेश की जाने लगी।

आसपा इसके पक्ष में नही थी। पार्टी पहले ही इस सीट पर स्थानीय समीकरणों को साधते हुए राव मौसम अली को प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी सौंप चुकी थी। सीटों के इसी तालमेल और अंदरूनी खींचतान के बीच यह गतिरोध उत्पन्न हुआ।