मौके पर धान, फोटो में गन्ना! सर्वे की अजीब चूक ने अटकाया किसानों का भुगतान, भटकने को मजबूर
शाहजहांपुर में किसान धान बेचने के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि सरकारी सर्वे रिपोर्ट में गड़बड़ी के कारण मौके पर ...और पढ़ें

शाहजहांपुर की रोजा मंडी लगा धान का लगा ढेर। जागरण
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मंडियों में लगातार बढ़ रही धान की आवक, सरकारी क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। दिन देखा न शाम, कड़ी मेहनत करके फसल तैयार की। बेसहारा पशुओं को बचाने के लिए जाग-जागकर रात काटी, लेकिन जब उपज बेचने की बारी आई तो प्रशासन की लापरवाही भारी पड़ गई। अपना ही धान लेकर किसान केंद्रों के बाहर घूम रहे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही।
धान को आढ़तों पर बेचना पड़ रहा है, जिस कारण प्रति क्विंटल चार से पांच सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जनपद में धान अब तक धान की आवक 25 लाख क्विंटल के ऊपर हो चुकी है।
बावजूद इसके सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक केवल 652 किसानों से 38500 क्विंटल धान ही खरीदा जा सका है। आवक और खरीद में इतने बड़े अंतर पर कोई भी जिम्मेदारी लेने काे तैयार नहीं है।
दरअसल इस बार उन्हीं किसानों का धान खरीदा जाना है जिनका फार्मर रजिस्ट्री पर पंजीकरण है। उसके बाद सर्वे कराने व उस पर लेखपाल की सत्यापन रिपोर्ट लगनी थी।
कानूनगो को सर्वे रिपोर्ट सत्यापित करनी थी। इसके बाद विभागीय पोर्टल पर आनलाइन सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद खरीद होनी थी, लेकिन सर्वे में ही गड़बड़ी की गई।
इसमें सही से गाटा संख्या नहीं भरी गई। मौके पर फसल व रिपोर्ट में लगाई गए फसल के फोटो में अंतर आया। जिस कारण पोर्टल पर सत्यापन न होने से कियान अपना धान नहीं बेच पा रहे।
मौके पर धान, फोटो में गन्ना
जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडे ने बताया कि धान खरीद में सबसे बड़ी परेशानी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री और खेतों के गलत सर्वे के कारण है।
फार्मर रजिस्ट्री का काम 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन कई किसानों के सभी गाटा नंबर पोर्टल पर दर्ज नहीं हैं। जिनके सभी गाटे दर्ज हैं तो उनकी फसल का पूरा सर्वे नहीं किया गया।
कुछ स्थानों पर सर्वे में धान दिखाया गया, लेकिन जो फोटो अपलोड हुए उनमें गन्ना लगा दिख रहा है। जिस कारण पोर्टल पर सत्यापन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। कई केंद्रों पर हैंडलिंग ठेकेदार की व्यवस्था न होने के कारा भी दिक्कत है।
पल्लेदारों की मैपिंग हैंडलिंग ठेकेदार को अपने पोर्टल और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) के माध्यम से करनी है, लेकिन ठेकेदार तय न होने के कारण पल्लेदारों की मैपिंग नहीं हो पा रही थी।
हैंडलिंग ठेकेदारों का चयन लाटरी के माध्यम से कर लिया है। इससे केंद्रों पर श्रमिकों की व्यवस्था सुचारू होने की उम्मीद है। किसानों को फार्मर रजिस्ट्री और गाटा संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए लेखपालों का सहयोग लिया जएगा। मंडियों में कृषि विभाग के कर्मचारी भी रहेंगे। किसान पहले लेखपाल से रिपोर्ट लगवाएंगे। इसके बाद एसडीएम उसका सत्यापन करेंगे।
- राकेश मोहन पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
किसानों की फसलों का सर्वे कृषि विभाग, राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने किया। जबकि दस प्रतिशत सर्वे सेटेलाइट के माध्यम से हुआ। लेखपाल व कानूनगो ने सत्यापन रिपोर्ट लगाई। फसल में अंतर आने से संबंधित 14 शिकायतें आईं हैं, इनमे मौके पर जब फोटो लिया गया तब धान की फसल थी, लेकिन बाद में फसल काटकर उसके स्थान पर दूसरी फसल लगा दी गई। इसलिए अंतर आ रहा है।
- पुरुषोत्तम मिश्र, उप निदेशक कृषि
हमारे पास सर्वे पोर्टल पर दर्ज न होने की शिकायत आ रही है। राजस्व कर्मियों ने नियमानुसार प्रकिया पूरी की है। किसानों के सर्वे में गड़बड़ी की शिकायत आईं हैं उन प्रकरण को दिखवाया जाएगा। इसमें कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारियों से भी बात की जा रही है।
- प्रभात राय, एसडीएम सदर
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