तेज आवाज नहीं, अब रोशनी का ट्रेंड: 560 शॉट से लेकर फैंसी स्मोक तक... दिवाली पर इस बार छाया ग्रीन क्रैकर्स का क्रेज
शाहजहांपुर में इस दीपावली पर तेज आवाज वाले पटाखों की जगह रंग-बिरंगी रोशनी और हरित पटाखों का क्रेज बढ़ा है। ...और पढ़ें

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HighLights
पिछले वर्ष की तुलना में दाम 20 प्रतिशत तक बढ़े, ईको-फ्रेंडली पटाखों की ज्यादा मांग
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। दीपावली नजदीक आते ही बाजार में घरों की सजावट और त्योहार के सामान के साथ आतिशबाजी की खरीदारी भी शुरू हो गई है। इस बार ग्राहक तेज आवाज वाले पटाखों के बजाय कम आवाज और अधिक रोशनी वाली आतिशबाजी पसंद कर रहे हैं।
ईको-फ्रेंडली यानी हरित पटाखों की मांग भी बढ़ी है। गत वर्ष के मुकाबले इनके दाम 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं, लेकिन बिक्री पर इसका खास असर नहीं दिख रहा।
हरित मानकों वाले पटाखों में 12, 30, 60 और 500 शाट वाले उत्पादों की मांग अधिक है। इन्हें जलाने पर आसमान में देर तक रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देती है।

बच्चों के लिए फुलझड़ी, अनार और पेपर शाट पसंद किए जा रहे हैं, जबकि युवा सिंगल शाट, थ्री शाट और फैंसी स्मोक वाले पटाखे खरीद रहे हैं।
मोर और कार्टून समेत अलग-अलग आकृतियां बनाने वाले पटाखे भी बाजार में उपलब्ध हैं। आग लगने पर ये फुलझड़ी की तरह जलते हुए आकृति बनाते हैं, लेकिन अधिक कीमत के कारण इनके ग्राहक सीमित हैं।
शिवकाशी से आती है आतिशबाजी
आतिशबाजी का 80 प्रतिशत हिस्सा तमिलनाडु के शिवकाशी से आता है। दीपावली से पहले ही बिक्री शुरू हो जाती है और कुल बिक्री का 60 प्रतिशत पहले हो जाता है।
धनतेरस से दीपावली तक के तीन दिनों में करीब 30 से 35 करोड़ रुपये का फुटकर कारोबार होता है। गत्ते और केमिकल के दाम बढ़ने से इस बार आतिशबाजी की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
बाजार में आतिशबाजी 130 रुपये से शुरू होती है। 560 शाट तक के बड़े फैंसी उत्पादों की कीमत 12 से 13 हजार रुपये तक है। पहले स्थानीय स्तर पर विभिन्न जगहों पर तिकोना और अनार आदि बनाए जाते थे, लेकिन अब इनका उत्पादन नाममात्र रह गया है।
हरित पटाखों से कम उत्सर्जन
हरित पटाखे अन्य पटाखों की तुलना में 30 प्रतिशत कम पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं। इनमें सल्फर और नाइट्रोजन का इस्तेमाल कम होने से उत्सर्जन 30 से 35 प्रतिशत कम होता है। इनके पैकेट पर क्यूआर कोड और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन का लोगो रहता है। सामान्य पटाखों की तुलना में इनकी कीमत अधिक नहीं होती और इनका धुआं कम नुकसान पहुंचाता है।
हरित मानक वाली आतिशबाजी की मांग तेजी से बढ़ी है। लोग अब चाइनीज और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से दूरी बना रहे हैं।हमारे गोदाम की क्षमता दो लाख किलोग्राम है। इसके अलावा दो मुख्य दुकानों की क्षमता 1500 और 600 किलोग्राम है। छोटे लाइसेंसधारियों की क्षमता भी 600 किलोग्राम तक बढ़ाई गई है।
- वेद प्रकाश गुप्ता, आतिशबाजी के थोक व्यापारी
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