संत कबीर नगर में सरयू का जलस्तर घटा पर जलभराव से फसलें बर्बाद, रबी की बुवाई पर भी संकट
संत कबीर नगर में सरयू नदी का जलस्तर घटने के बावजूद खेतों में जलभराव से खरीफ की फसलें बर्बाद हो ...और पढ़ें

संपर्क मार्गों पर पानी से आवागमन प्रभावित। जागरण
जागरण संवाददाता, धनघटा। सरयू नदी के जलस्तर में अब गिरावट शुरू हो गई है। इससे नदी की धारा और महाबांध के बीच बसे डेढ़ दर्जन से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, गांवों के सीवान में खेतों में अब भी जलभराव होने से किसानों की परेशानी कम नहीं हुई है।
जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पानी में डूबी खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई हैं। खेतों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण रबी की फसल की बुवाई पर भी संकट मंडराने लगा है।
खेतों में पानी भरा रहने से चारे के लिए बोई गई ज्वार-बाजरा की फसल भी नष्ट हो गई है। मक्के की खेती को भी जलभराव से भारी नुकसान हुआ है। फसलें बर्बाद होने के कारण पशुपालकों के सामने चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। किसानों को आशंका है कि समय से जलनिकासी नहीं हुई तो रबी की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
सीयरकला गांव जाने वाले संपर्क मार्ग पर अब भी जलभराव होने से आवागमन मुश्किल बना हुआ है। ग्रामीणों को करनपुर होते हुए एमबीडी बांध का चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है। गायघाट दक्षिणी गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों की भी यही स्थिति है। पहले जहां ग्रामीण करीब 10 मिनट में घर पहुंच जाते थे, वहीं अब घूमकर जाने में एक घंटे तक का समय लग रहा है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा
सरयू नदी का जलस्तर कम होने के बावजूद जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से नदी की धारा और महाबांध के बीच बसे गुनवतिया, ढोलबजा, कंचनपुर, गायघाट दक्षिणी, कटहा-खैरगाड़, खरैया, सरैया, चकदहा, भौवापार, सीयरकला, टोला सियाराम, अधीन सिंह, चपरा पूर्वी के पटौवा व केवटाही टोला, खालेपुरवा, आगापुर, गुलरिहा और कुर्मियान सहित अन्य गांवों में जगह-जगह जलभराव बना हुआ है।
लंबे समय से पानी जमा होने के कारण आबादी के आसपास दुर्गंध फैलने लगी है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले स्थानों पर दवा का छिड़काव कराने और जल्द जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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ग्रामीण राजेंद्र, प्रिंस पाठक, रमेश, सत्य प्रकाश, सूर्यबली, लाल बिहारी और रमाशंकर आदि का कहना है कि जब तक जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हर वर्ष बाढ़ के बाद ग्रामीणों को इसी तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। ढोलबजा, चकदहा, भौवापार, करनपुर, सीयरकला, अधीन और खरहिया सहित आसपास के गांवों के लोगों ने स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कराने की मांग की है।
