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संभल की बेटियां लिख रहीं सफलता की नई इबारत, किसी ने संभाला कारोबार तो किसी ने राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया नाम

Published: Sun, 11 Oct 2026 06:30 PM (IST)

संभल की तीन महिलाओं पूर्वी वार्ष्णेय, कुसुम आर्य और आयुषी सागर ने अपने संघर्ष, हुनर और मेहनत से सफलता की नई मिसालें कायम की हैं।

पूर्वी वार्ष्णेय, कुसुम आर्या और आयुषि सागर। बाएं से दाएं

पूर्वी वार्ष्णेय, कुसुम आर्या और आयुषि सागर। बाएं से दाएं

HighLights

  1. पूर्वी वार्ष्णेय ने पति का हस्तशिल्प निर्यात कारोबार संभाला।

  2. कुसुम आर्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं।

  3. आयुषी सागर ने राष्ट्रीय कुश्ती-कुराश में पदक जीते।

जागरण संवाददाता, संभल। संभल की इन महिला और बेटियों ने अपने संघर्ष, हुनर और मेहनत से सफलता की नई इबारत लिखी है। किसी ने पति के निधन के बाद कारोबार की जिम्मेदारी संभालकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की तो कोई महिलाओं को सशक्त बनाने में जुटी है। वहीं, कुश्ती और कुराश के दांव-पेच से आयुषि सागर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर रही हैं। तीनों की कहानी हौसले, संकल्प और सफलता की प्रेरक मिसाल है। प्रस्तुत है बेटियों की सफलता की कहानियां-

पूर्वी ने पति के कारोबार को बनाया अपनी ताकत, संभाला हस्तशिल्प निर्यात का जिम्मा

चार जून 2018 को पति दीपक कुमार वार्ष्णेय के निधन के बाद पूर्वी वार्ष्णेय की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उनके पति हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट कारोबार से जुड़े थे और हस्तशिल्प उत्पादों का विदेशों में निर्यात करते थे। उस समय उनका बेटा महज 11 वर्ष का था। परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। व्यवसाय चलाने का अनुभव न होने के बावजूद पूर्वी ने हार नहीं मानी और पति का कारोबार संभालने का निर्णय लिया।

शुरुआत में ग्राहकों से संपर्क, आर्डर संभालने और निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं को समझने में कई चुनौतियां आईं। उन्होंने धैर्य और मेहनत से कारोबार की बारीकियां सीखीं। बेटे का भविष्य संवारने और पति की मेहनत को आगे बढ़ाने के संकल्प ने उन्हें हिम्मत दी। विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने जिम्मेदारियों को अपनी ताकत बनाया और आत्मनिर्भरता की राह चुनी। अब विदेशों में आर्डर भिजवा रही हैं।

गांव-गांव महिलाओं को जगा रहीं कुसुम

सरायतरीन निवासी कुसुम आर्य नारी उत्थान समिति की सक्रिय सदस्य हैं। वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। गांव-गांव जागरुकता शिविर और बैठकें आयोजित कर महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

कुसुम का मानना है कि जागरुकता और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। वह महिलाओं को अपनी क्षमताएं पहचानने, मुश्किल परिस्थितियों का डटकर सामना करने और अपने पैरों पर खड़े होने का संदेश देती हैं।

युवाओं से भी उनकी अपील है कि वे शिक्षा और अपने कार्य पर पूरा ध्यान दें। उनका कहना है कि मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास से ही जीवन में निर्धारित लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

कुश्ती-कुराश में आयुषि के दांव-पेच, राष्ट्रीय मंच पर चमकाया संभल का नाम

गांव असालतपुरा की आयुषि सागर कुश्ती और कुराश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। गांव कल्यानपुर स्थित त्यागी स्पोर्ट्स एंड कन्या गुरुकुल में कोच भोले सिंह त्यागी के निर्देशन में प्रशिक्षण लेने वाली आयुषि ने राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर और सहारनपुर में आयोजित राष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते।

इसी वर्ष रायपुर में हुई राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। आयुषि का चयन उत्तर प्रदेश की ओर से राष्ट्रीय जूडो और कुराश प्रतियोगिताओं के लिए हुआ है।

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