'मस्जिद की सीढ़ियों पर खड़े होकर लगवाए नारे...' संभल हिंसा मामले में सांसद जियाउर्रहमान बर्क की बढ़ीं मुश्किलें
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और डीएम-एसपी के बयानों में संभल हिंसा भड़काने के लिए सांसद जियाउर्रहमान बर्क को जिम्मेदार ...और पढ़ें

संभल में हिंसा से पहले जामा मस्जिद में जुमा की नमाज पढ़ने जाते सांसद जियाउर्रहमान बर्क। जागरण आर्काइव
HighLights
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में किया गया उल्लेख, डीएम-एसपी के बयान में भी ठहराया जिम्मेदार
सौरव प्रजापति, संभल। हिंसा भड़काने का सीधा सीधा आरोप सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कुंदरकी में उपचुनाव हुआ, क्योंकि विधायक जियाउर्रहमान संभल से सांसद चुने गए थे। 23 नवंबर 2024 को मतगणना हुई, जिसमें सपा उम्मीदवार को भाजपा के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा।
यह सांसद और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका था। सांसद ने सपा प्रत्याशी के हार का जिम्मेेेदार पुलिस-प्रशासन को ठहराया था। डीएम-एसपी ने भी अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि इस हिंसा को भड़काने में सांसद का मुख्य रोल रहा है। उन्होंने मस्जिद की सीढ़ियों पर खड़े होकर बयानबाजी के साथ नारे भी लगवाए थे।
नियम को तोड़कर प्रेसवार्ता कर माहौल को बिगाड़ा था। इसलिए हिंसा के मुकदमे में सांसद नामजद हैं।हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगी हुई है। हाल ही में सांसद ने मीडिया को बयान देते हुए कहा था कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट गलत होने की आशंका है। उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
न्यायिक जांच आयोग को पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई द्वारा दिए गए बयान में कहा गया है कि सर्वेक्षण के दौरान सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और संभल विधायक के बेटे सुहैल इकबाल मस्जिद के अंदर लगभग 200 अन्य व्यक्तियों के साथ मौजूद थे। चूंकि यह शाम का समय था और इतने सारे लोग मौजूद थे, सर्वेक्षण सुचारू रूप से नहीं हो सका।
जनप्रतिनिधियों और अन्य मौजूद व्यक्तियों ने बार-बार सर्वेक्षण प्रक्रिया में बाधा डाली और धमकियां दीं। ऐसे ही तत्कालीन डीएम डा. राजेंद्र पैंसिया ने अपने बयान में कहा कि सर्वेक्षण के दौरान सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और विधायक के बेटे सुहेल इकबाल मस्जिद के अंदर लगभग 200 अन्य व्यक्तियों के साथ मौजूद थे।
चूंकि यह शाम का समय था और इतने सारे लोगों की उपस्थिति के कारण सर्वेक्षण सुचारू रूप से नहीं हो सका, सार्वजनिक प्रतिनिधियों और अन्य उपस्थित लोगों ने बार-बार सर्वेक्षण प्रक्रिया में बाधा डाली और धमकियां दीं।
लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री जिया-उर-रहमान बर्क ने बिना प्रशासनिक अनुमति के धारा 163 बीएनएसएस का उल्लंघन करते हुए विवादित धार्मिक स्थल पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, भीड़ एकत्र की, कोर्ट के आदेश से असहमति व्यक्त की और एक विशेष समुदाय को एकजुट होने और विवादित स्थल की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होने का आह्वान किया, जो राजनीतिक लाभ के लिए था।
यह संवेदनशील वातावरण में भड़काऊ था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से, उन्होंने जिला पुलिस और प्रशासन की भूमिका और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कोर्ट के आदेश के अनुपालन में किए जा रहे। सर्वेक्षण का कड़ा विरोध किया।
इस कार्य के लिए दिनांक 23.11.2024 को उनके खिलाफ धारा 168 बीएनएसएस के तहत नोटिस जारी किया गया और तामील किया गया। दिनांक 23.11.2024 को कुंदरकी उप-चुनाव का परिणाम घोषित हुआ, जहां पहले जिया-उर-रहमान बर्क विधायक थे। समाजवादी पार्टी इस सीट पर हार गई।
चूंकि चुनाव परिणाम अपेक्षित नहीं थे, उन्होंने पुलिस और प्रशासन को हार के लिए दोषी ठहराया, उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए और प्रेस कान्फ्रेंस के माध्यम से उत्तर प्रदेश में संविधान की हत्या जैसे शब्दों का उपयोग किया तथा जनता को पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भड़काया गया और हिंसा के लिए अनुकूल वातावरण बनाया गया।
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