संभल दंगे का काला इतिहास: आजादी के बाद 15 बार सुलग उठा शहर, जांच रिपोर्ट में 1947 से 2019 की दर्दनाक दास्तान
संभल में 1947 से 2019 तक सांप्रदायिक तनाव और हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें 15 बड़े दंगे ...और पढ़ें

संभल में हिंसा के दौरान भीड़ को रोकती पुलिस। जागरण आर्काइव
HighLights
सांप्रदायिक तनाव की लंबी कहानी में 1947 से 2019 तक दर्ज 15 दंगे
संवाद सहयोगी, संभल। संभल से इतिहास सांप्रदायिक तनाव, हिंसा और दंगे भी जुड़े हुए हैं। उपलब्ध अभिलेखों और न्यायिक जांच आयोग के समक्ष दिए गए बयानों के अनुसार 1947 से 2019 के बीच संभल में 15 बार दंगे और सांप्रदायिक बवाल हुए। इनमें 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 के दंगे शामिल हैं। वर्ष 2024 की हिंसा को भी अलग से दर्ज किया गया है।
1936-37 में भी सांप्रदायिक दंगे की घटनाओं का उल्लेख पुलिस रिकार्ड में मिलता है, हालांकि एसपी संभल ने आयोग के समक्ष बताया कि उपलब्ध अभिलेखों में घटनाओं की तारीख और स्थान का स्पष्ट विवरण नहीं है। 1947 में विभाजन के दौरान हिंसा हुई और हातिमसराय से जुड़े घटनाक्रम में जगदीश शरण की हत्या हुई।
1948 में दंगे के बाद करीब 20 दिन कर्फ्यू रहा और छह हिंदुओं की मृत्यु हुई। 1953 में शिया-सुन्नी समाज में संघर्ष हुआ। 1958 में हिंद इंटर कालेज के छात्रों के बीच हिंसक झड़प के बाद दो दिन कर्फ्यू लगाया गया। 1962 में चुनाव के दौरान तनाव में पूर्व जनसंघ विधायक महेश गुप्ता पर हमला हुआ।
1976 में हिंसा के दौरान कई हत्याएं, आगजनी और धार्मिक स्थलों पर हमले हुए तथा सात दिन कर्फ्यू रहा। 1978 की हिंसा सबसे भयावह रही। उस दौरान होली के बाद भड़के दंगे कई दिनों तक चले और बड़े पैमाने पर लोगों की मौत हुई। पुराने सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या 24 बताई गई, जबकि बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में 184 लोगों के मारे जाने की बात कही थी।
दंगे के बाद 162 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। इसके बाद 1980 के मुरादाबाद दंगे की लपटें संभल तक पहुंचीं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी। 1982 में बाबरी मस्जिद का ताला खुलने के विरोध के दौरान तनाव बढ़ा और हरीशंकर रस्तोगी की हत्या हुई।
1986 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के बीच हिंसा हुई, जिसमें कई हिंदुओं की हत्या और दुकानों में आगजनी-लूट की घटनाएं हुईं। 1990, 1992 और 1995 में भी हिंसा हुई। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद संभल में हिंसा भड़की और अलग-अलग घटनाओं में पांच हिंदुओं की हत्याएं हुईं।
1995 में दो बाहरी हिंदुओं की हत्या के बाद आठ दिन कर्फ्यू रहा। 2019 में सीएए-एनआरसी विरोध के दौरान पथराव, आगजनी और गोलीबारी हुई, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। इस तरह संभल ने 1930 के दशक से लेकर 2019 तक बार-बार सांप्रदायिक तनाव के दौर देखे।
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