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₹300 के लालच में बच्चों से करवाते थे चोरी: दिल्ली के फुटपाथ पर सजता था बाज़ार, 10 लाख के 42 फोन संग गिरोह का पर्दाफाश

Published: Sat, 10 Oct 2026 04:20 PM (IST)

झारखंड के एक गिरोह ने नाबालिगों से मोबाइल चोरी करवाकर दिल्ली के फुटपाथ बाजारों में बेचे। गुन्नौर पुलिस ने 10 ...और पढ़ें

गुन्नौर पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए मोबाइल चोर गिरोह के सदस्य। जागरण

गुन्नौर पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए मोबाइल चोर गिरोह के सदस्य। जागरण

HighLights

  1. झारखंड के निवासी हैं तीनों आरोपित, बिहार और झारखंड के नाबालिगों से कराते थे मोबाइल चोरी

संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। झारखंड के रहने वाले सदस्यों का एक ऐसा गिरोह जो बिहार और झारखंड से नाबालिगों को लाकर उनसे 300 से 500 रुपये में मोबाइल चोरी करवाता है। फिर उसे दिल्ली में फुटपाथ बाजार रखकर बेच देता है। गुन्नौर पुलिस ने एक नाबालिग समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

इनके पास से अलग-अलग कंपनियों के 42 एंड्रायड मोबाइल और चोरी का एक आधार कार्ड मिला है। जिनकी कीमत करीब दस लाख रुपये है। एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि आठ अक्टूबर को गुन्नौर के बाजार में बबराला के ओमप्रकाश और जगन्नाथपुर के इमरान के मोबाइल चोरी हुए थे।

इसकी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरों पहचाना गया। मोबाइल चोरी करने वाले बच्चों को सबसे पहले जवाहर चौराहे पर देखा गया।

उसके बाद अन्य तीनों को निकट के बंद पड़े सर्विस स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। बच्चे के अलावा पकड़े गए तीनों आरोपित झारखंड के साहेबगंज जिले के तालझाड़ी थाना क्षेत्र के महाराजपुर, नया टोला कल्याणी गांव के निवासी हैं।

इनमें दिनेश कुमार मेहतो और करन कुमार वर्तमान में अलीगढ़ के पाठकपुर स्थित विष्णुपुरी में, जबकि सुरंजन कुमार शाह अलीगढ़ की नई बस्ती, मसूदाबाद में रह रहा था।

थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि चोरी की वारदात के बाद चारों लोग गुन्नौर में ही रुके थे और शनिवार की सुबह को जुनावई की साप्ताहिक बाजार जाने की तैयारी कर रहे थे।

संभल के साथ हाथरस, कासगंज, एटा और अलीगढ़ में भी की वारदात

इस गिरोह के सदस्य बिहार और झारखंड से छोटे बच्चों को अपने साथ लाते हैं। शहरों में किराये के मकान लेकर रहते और बच्चों से भीड़भाड़ वाले बाजारों में मोबाइल चोरी कराते हैं।

हर मोबाइल चोरी करने के बदले बच्चों को 300 से 500 रुपये दिए जाते थे। गिरोह अलीगढ़ के अलावा संभल, हाथरस, कासगंज और एटा के बाजारों में मोबाइल चोरी करता था।

पहले किसी जिले में वारदात के बाद पुलिस इनके पीछे पड़ती तो यह दूसरी जनपद में भाग जाते और वहां वारदात कहते हैं। इसके बाद चोरी के फोन दिल्ली के फुटपाथ बाजारों में ग्राहकों को बेचकर रुपये कमाता था।

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