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सावधान! आज से बदल रही है ग्रहों की चाल, अगले 8 दिन तक भूलकर भी न करें ये गलतियाँ

Published: Mon, 23 Feb 2026 09:30 PM (IST)

होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित शोभित शास्त्री के अनुसार, इन 8 दिनों में ग्रहों की ...और पढ़ें

होलाष्‍टक

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संवाद सहयोगी, संभल। 24 फरवरी से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। पंचांग के अनुसार यह अवधि तीन मार्च तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र में इन आठ दिनों को विशेष महत्व दिया गया है और इस दौरान विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
होली से ठीक आठ दिन पहले प्रारंभ होने वाला होलाष्टक इस बार 24 फरवरी से शुरू होकर तीन मार्च को समाप्त होगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित शोभित शास्त्री ने बताया कि होलाष्टक को तप, परीक्षा और श्रद्धा का काल माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था, इसलिए इस अवधि की शुरुआत को विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन आठ दिनों में ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं, जिससे वातावरण में अस्थिरता और मानसिक विचलन की स्थिति बन सकती है।

इसी कारण इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। नया व्यवसाय शुरू करना, घर खरीदना या बड़ा निवेश करना भी टालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों में बाधाएं या रुकावट आ सकती हैं। हालांकि होलाष्टक में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं, लेकिन जन्म और मृत्यु के बाद किए जाने वाले आवश्यक संस्कार किए जा सकते हैं। ये कार्य अनिवार्य श्रेणी में आते हैं, इसलिए इन्हें टालने का विधान नहीं है।

धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी काल में असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने बेटे भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दी थीं, लेकिन प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और विश्वास के आगे सभी विपत्तियां हार गईं। यही कारण है कि होलाष्टक को परीक्षा और आस्था की कसौटी का समय भी कहा जाता है।

शास्त्रों में इस अवधि को आत्ममंथन, संयम और साधना का समय बताया गया है। लोग इस दौरान अधिक से अधिक पूजा-पाठ, जप और ध्यान में समय व्यतीत करते हैं। होलाष्टक समाप्त होने के बाद होली का उल्लास अपने चरम पर पहुंचता है और फाल्गुन पूर्णिमा को रंगोत्सव मनाया जाता है।

संभल सहित आसपास के क्षेत्रों में भी होलाष्टक को लेकर लोगों में जागरूकता है। धार्मिक आस्थावान परिवार इन आठ दिनों में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचते हुए आध्यात्मिक गतिविधियों पर जोर देते हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि संयम और श्रद्धा के साथ बिताए गए ये आठ दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।


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