होली पर अयोध्या-काशी ही नहीं, विदेश भी होगा संभल के गुलाल से सराबोर; पहली बार चखने को मिलेगा 'चॉकलेट फ्लेवर'!
संभल का हर्बल गुलाल इस होली पर अपनी सुगंध और गुणवत्ता के लिए चर्चा में है। चंदन, गुलाब और जैसमीन ...और पढ़ें
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संभल होली के लिए तैयार किए गए गुलाल को सुखाते हुए जागरण
HighLights
होली के लिए 300 का टन हो रहा उत्पादन, चाकलेट और कोकोनट का फ्लेवर पहली बार
दिलीप कुमार, संभल। रंगों का त्योहार होली चार मार्च को है। संभल में चंदन, गुलाब, जैसमीन की खुशबू से हर्बल तैयार किया जा रहा। सुगंध और उत्तम गुणवत्ता के लिए मशहूर संभल के गुलाल की प्रदेश ही नहीं अन्य राज्यों में भी मांग रहती है। तीन-चार माह पहले से संभल में गुलाल बनाने का काम शुरू हो जाता है।
संभल के भगवा गुलाल की मथुरा, काशी में बढ़ी है, वहीं इस बार अयोध्या भी माल सप्लाई हो रहा। खास बात यह है कि नेपाल से पहली बार 10 टन का आर्डर मिला है। इतना ही नहीं चाकलेट और काकोनट के फ्लेवर में भी पहली बार रंग तैयार किया जा रहा है। नगर में हर्बल गुलाल के लिए प्राकृतिक चंदन, गुलाब और जैसमीन की सुगंध डाली जाती है, जो कन्नौज और अहमदाबाद से मंगवाई जाती है।
इस बार भगवा गुलाल सबसे ज्यादा मांग में है। इस सीजन में करीब 300 टन हर्बल गुलाल का उत्पादन किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश समेत झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, असम, तमिलनाडु और बिहार सहित 12 राज्यों में भेजा जा रहा है। बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक अनुभव और वैज्ञानिक तकनीक का मेल है।
आधार सामग्री के रूप में मक्का के आटे का उपयोग होता है। इसके बाद प्राकृतिक फूलों के रंग मशीनों के जरिये मिलाए जाते हैं। तैयार मिश्रण को चार दिन तक धूप में सुखाकर दोबारा बारीक पिसाई की जाती है। अंतिम चरण में विशेष खुशबू मिलाई जाती है, जिससे इसकी अलग पहचान बनती है।
फर्म स्वामी हर्ष गुप्ता बताते हैं कि काशी, मथुरा के साथ अब अयोध्या में धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में भी संभल का गुलाल पहुंच रहा है। पहली बार नेपाल से आर्डर मिला है। निर्माता बृजेश गुप्ता ने रंग बनाने की शुरूआत 1990 में की थी। पहले वह अपने पिता जी का हाथ बंटाते थे। धीरे-धीरे उन्होंने उन्होंने खुद ही घर पर गुलाल बनान सीखा। इसके बाद वह संभल में ही दुकानों पर रंग सप्लाई करने लगे।
फलों की खुशबू से भी तैयार होता गुलाल, रोजगार भी खिला
फूलों, चाकलेट, काकोनट के साथ ही यहां फलों की खुशबू से भी गुलाल तैयार किया जाता है। इस गुलाल की मांग भी खूब बड़ रही है। दिसंबर से ही आर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं और फरवरी तक उनके आर्डर पूरे हो जाते हैं। खास बात यह है कि होली सीजन में संभल का हर्बल गुलाल उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार का मजबूत आधार बनता जा रहा है।
कच्चे माल की छनाई, रंग मिश्रण, धूप में सुखाने, पिसाई और पैकिंग तक की प्रक्रिया में दर्जनों श्रमिक जुटते हैं। लगभग 70 परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर इस उद्योग से जुड़ी है। सीजन के दौरान काम का दायरा बढ़ने से करीब 80 परिवारों को भी रोजगार मिलता है। महिलाएं पैकिंग कार्य करती हैं।
