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संभल का लाल; जिसने पोलियोग्रस्त पैर से साधा ऐसा निशाना कि PM मोदी भी हो गए मुरीद, जानिए कौन हैं दीपेंद्र सिंह

Published: Wed, 21 Oct 2026 12:00 AM (IST)

संभल के दीपेंद्र सिंह ने पोलियो की चुनौती पार कर निशानेबाजी में विश्व स्तर पर पहचान बनाई, टोक्यो पैरालंपिक तक ...और पढ़ें

मेरठ में पैरा खिलाड़ी दीपेंद्र सिंह को सम्मानित करते सीएम योगी आदित्य नाथ। आर्काइव : सौ. स्वयं

मेरठ में पैरा खिलाड़ी दीपेंद्र सिंह को सम्मानित करते सीएम योगी आदित्य नाथ। आर्काइव : सौ. स्वयं

HighLights

  1. दिव्यांगता को मात देकर टोक्यो पैरालंपिक तक पहुंचे संभल के दीपेंद्र सिंह

दिलीप कुमार, संभल। जापान में पैरा एशियाई खेल के पहले ही दिन भारतीय दल ने चार स्वर्ण पदक जीते। दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियां दूसरों के लिए मिसाल हैं। संभल के दीपेंद्र सिंह भी अपनी मेहनत से विश्व पटल पर पहचान बना चुके हैं। बचपन से दाहिने पैर में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने निशानेबाजी में देश का नाम रोशन किया।

थाईलैंड विश्व कप में व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने वाले दीपेंद्र टोक्यो पैरालंपिक तक पहुंचे। अब नौकरी के साथ गांव में शूटिंग एकेडमी चलाकर नई प्रतिभाओं को तराश रहे हैं।

गोल्ड मेडल के साथ पैरा खिलाड़ी दीपेंद्र सिंह। सौ. स्वयं

असमोली के गांव भटपुरा निवासी दीपेंद्र का जन्म 15 जून 1994 को किसान राजपाल सिंह के परिवार में हुआ। वर्ष 2015 में उन्होंने चंदौसी के राधा गोविंद इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

इसी दौरान अखबारों में एयर पिस्टल निशानेबाजी की खबरें पढ़कर उनकी इस खेल में रुचि बढ़ी। मुख्य कोच जसपाल राणा के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने निशानेबाजी सीखने का फैसला किया।

वर्ष 2014 में बड़ौत के बिनौली में कोच अमित श्योराण के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू करने के अगले ही वर्ष उन्होंने राष्ट्रीय, राज्य और जोनल स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 2017 में थाईलैंड विश्व कप की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए। वर्ष 2018 में इंडोनेशिया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्हें सातवीं रैंक मिली।

वर्ष 2019 में सिडनी में विश्व चैंपियनशिप और सिडनी कप में स्वर्ण पदक जीते। फ्रांस में आयोजित विश्व कप में दीपेंद्र ने टोक्यो पैरालंपिक का कोटा हासिल किया। वर्ष 2021 में पैरालंपिक में उन्हें 10वीं रैंक मिली।

खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी उन्हें बेहतर तैयारी कर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। दीपेंद्र खेल कोटे से मुंबई में आयकर विभाग में कार्यरत हैं।

उनकी पत्नी नीतू गाजियाबाद में सरकारी शिक्षिका हैं। व्यस्तताओं के बावजूद वह गांव से जुड़े हैं।भटपुरा में आरएसए शूटिंग एकेडमी शुरू कर रैना स्पोर्ट्स एसोसिएशन के माध्यम से बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

वह आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए गाजियाबाद और दिल्ली में अभ्यास भी कर रहे हैं। अब उनका लक्ष्य गांव की प्रतिभाओं को मंच देकर उन्हें निशानेबाजी में आगे बढ़ाना है।

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