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बरसते फूल, गूंजते नगाड़े: चंदौसी की सड़कों पर उतरा आस्था का समंदर, बप्पा की भक्ति में थमा शहर

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:53 PM (IST)

चंदौसी और संभल में गणेश चतुर्थी पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन आयोजनों ...और पढ़ें

गणेश प्रतिमा स्थापित करने से पहले शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु। जागरण

गणेश प्रतिमा स्थापित करने से पहले शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु। जागरण

HighLights

  1. नगाड़ों की थाप, स्वचलित झांकियों के जादू और जनसमुद्र के बीच निकली गजानन शोभायात्रा

  2. केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने फीता काटकर किया उद्घाटन, राज्यमंत्री गुलाब देवी ने किया पूजन

जागरण संवाददाता, चंदौसी। सोमवार को चंदौसी की सड़कें आस्था के उस अनंत महासागर में बदल गईं, जहां हर लहर भक्ति की थी और हर दिल गजानन के रंग में रंगा हुआ था। भोर की पहली किरण के साथ ही गणेश मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जो तांता लगा, वह दोपहर होते-होते एक जनसमुद्र का रूप ले चुका था।

दोपहर में जब गणेश शोभायात्रा शुरू हुई तो नगर की सड़कें छोटी पड़ गईं, छतें श्रद्धा के गवाहों से पट गईं और पूरा नगर जैसे थमकर बप्पा की अगवानी में बिछ गया। मानिएगा चंदौसी का दिल गजानन की भक्ति मे धड़काते हुए नजर आ रहा था।

केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने फीता काटकर शोभायात्रा का उद्घाटन किया। उनसे पहले राज्यमंत्री गुलाब देवी ने मंदिर में गणेश पूजन किया। शोभायात्रा के दौरान नगाड़ों की थाप और बैंड की गूंज से लोगों के कदम खुद-ब-खुद थिरक रहे थे।

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सामने से गुजरतीं सजीव झांकियां और उन्हें निहारती लाखों की वो भीड़, जो अपने आराध्य की एक झलक पाने को बेताब थी। यह भक्ति का वह उफान था, जो तड़के उठा और देर रात तक थमा ही नहीं।

शोभायात्रा में महाप्रभु गणेश, नंदी बाबा पर विराजित गणेश भगवान, हनुमान जी, कुबेर, भगवान राम आदि की स्वचलित झांकियां शामिल रहीं। हाथ उठाकर आर्शीवाद देते, डमरू बजाते अपने इष्ट को लोग मंत्रमुग्ध होकर देखते रहे।

दिल्ली, मेरठ और हापुड़ समेत अन्य स्थानों से आए बैंड बाजों ने भक्ति गीतों की धुनें छेड़ीं तो लोगों के कदम थिरकने लगे। महाप्रभु गणेश का दिव्य रथ जब गुजरा तो एक झलक पाने के लिए सड़कों के दोनों किनारों पर हजारों लोग खड़े रहे।

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छतों से श्रद्धालुओं ने रथ पर पुष्पवर्षा की। देर रात मंदिर पहुंचकर शोभायात्रा ने विश्राम किया। यहां पर भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, पालिकाध्यक्ष लता वार्ष्णेय राजेश शंकर राजू, परमेश्वरी लाल सैनी समेत मेला कमेटी के हरिगोपाल, ललित किशोर, मनोज गुप्ता, रवीद्र रूपी, डाॅ. राजीव गुप्ता, सतेंद्र मामा, शुभम अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

तकनीक ने दी संजीवनी, आस्था ने भरी जान...बप्पा की यात्रा में झूमा हर इंसान

चंदौसी। गणेश चतुर्थी के अवसर पर शहर में निकली भव्य शोभायात्रा केवल श्रद्धालुओं की भीड़ तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें शामिल विविध झांकियां कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक की अद्भुत मिसाल बन गईं। दूर-दराज से आए कलाकारों और शिल्पकारों की मेहनत ने हर झांकी में मानों प्राण फूंक दिए थे।

शोभायात्रा में शामिल भगवान गणेश, नंदी पर विराजित गजानन, माता महाकाली, कालरात्रि, कुबेर, भगवान राम आदि की झांकियों को इस तरह स्वचलित किया गया था कि वे सजीव प्रतीत हो रही थीं।

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हाथ उठाकर भक्तों को आशीर्वाद देना, डमरू वादन और नृत्य मुद्रा जैसी कलाओं को देखकर लोग भी आश्चर्यचकित रह गए। वराह अवतार और जगन्नाथ जी की झांकी ने सनातन परंपराओं और पौराणिक गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

यहां विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। राजस्थानी बौना-बौनी ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया तो वहीं केरल के कोच्चिपुरी ढोल और पंजाब के भांगड़ा दल ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से सबको उत्साह से भर दिया।

धार्मिक स्वरूपों के अलावा देशभक्ति पर आधारित विशेष झांकी ने लोगों में राष्ट्रप्रेम का संचार किया। गोरिल्ला, गुड्डा और लंबू जैसे मुखौटा कलाकारों ने बच्चों का मनोरंजन किया।

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दिल्ली, मेरठ, बरेली, हापुड़ और जेवर से आए नामी बैंडों की टोलियां भी शामिल रहीं। मेरठ के 15 सदस्यीय लेडीज बैंड की सुरीली धुनों ने सभी का ध्यान खींचा, तो महाराष्ट्र बैंड और स्थानीय चंदौसी ढोल की गूंज पर लोग रास्ते भर झूमते रहे।

छतों पर जमे रहे लोग, की गई पुष्पवर्षा

चंदौसी। शोभायात्रा मंदिर से शुरू होकर नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई करीब चार किमी की यात्रा तय करके मंदिर पर जाकर देर रात समाप्त हुई। इसे देखने के लिए न केवल सड़क किनारे लोग जमे रहे, बल्कि छतों पर भी भीड़ जुट गई। कई जगहों पर लोगों ने झांकियों पर पुष्पवर्षा भी की।

शिक्षा का संदेश देती दिखी हनुमान जी की झांकी

चंदौसी। ग्लेज्ड पेपर, कटर, पेंसिल, मार्कर, कलरपेन आदि से तैयार की गई हनुमान जी की झांकी पर स्कूल चलो अभियान लिखा दिखाई दिया। झांकी को बनाने वाले अक्षय के मुताबिक इस झांकी को बनाने में करीब 60 हजार रुपये के आइटम प्रयोग किए गए।

इसके अलावा भी शोभायात्रा में शामिल हर झांकी की अलग विशेषता दिखाई दी। धन के देवता कुबेर को 10 व 20 के सिक्कों से सजाया गया। महाप्रभु गणेश की झांकी को मोरपंखी स्टोन का बनाया गया, जिसमें करीब 35 हजार मोरपंखी स्टोन, 10 हजार रंग बिरंगे स्टोन तथा पांच हजार शीशे की कटिंग का इस्तेमाल किया गया।

आस्था का उल्लास...बप्पा से मिले नैन, महाप्रसाद में घुली कौमी एकता की मिठास

सौरभ सक्सेना, चंदौसी। चंदौसी में गणेश महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, सद्भाव और अगाध श्रद्धा का एक अलौकिक पर्व बनकर आता है। सोमवार को ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों की गूंज के बीच जब बप्पा का प्रिय दो कुंतल का महाकाय बूंदी मोदक मंदिर की ओर बढ़ा, तो पूरा नगर भक्ति के रंग में सराबोर हो उठा।

इस महाप्रसाद की सबसे दिव्य बात इसकी मिठास में बसी कौमी एकता रही, जहां आयोजन की परिकल्पना से लेकर समर्पण तक मुस्लिम समाज के लोगों की आत्मीयता और प्रेम की महक साफ नजर आई।

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वर्ष 2000 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा आज 26 वर्षों का सुंदर इतिहास समेटे हुए है। लक्ष्मनगंज निवासी इश्त्याक बेग बताते हैं कि कभी पांच कुंतल से शुरू हुआ यह भोग भले ही समय के साथ दो कुंतल का हो गया हो।

परंतु इसके पीछे बहती श्रद्धा की धारा आज भी उतनी ही अविरल है। विकासनगर में बनकर यह मोदक यात्रा के रूप में निकलता है और मंदिर पर इसका भोग लगता है। फहीम, मतीन, नदीम, इंतजार समेत कई मुस्लिम लोग इसमें सहभागिता करते हैं।

इसके अलावा यहां की एक रीत यह भी है कि सौ से अधिक पंडालों और अनगिनत घरों में स्थापित होने वाली छोटी गणेश प्रतिमाओं को सबसे पहले मुख्य गणेश मंदिर लाया जाता है।

मेला सहयोगी सतेंद्र मामा बताते हैं कि यहां स्थापित बप्पा के दिव्य श्रीविग्रह के नयनों से इन नवीन प्रतिमाओं के नयन मिलाए जाते हैं, मानों स्वयं विघ्नहर्ता अपनी चैतन्य ऊर्जा और वात्सल्यमयी दृष्टि से उन प्रतिमाओं में प्राण फूंककर आशीर्वाद दे रहे हों। इस पवित्र मिलन के पश्चात श्रद्धालु बैंड-बाजे की ध्वनियों के साथ बप्पा को अपने घर और पंडालों में विराजमान करने ले जाते हैं।

तड़के से ही मंदिर पर लगने लगा मेला

चंदौसी। गणपति को घरों में विराजित करने से पहले मंदिर में दर्शन करने की परंपरा तो कई दशकों से चली आ रही है। ऐसें में सोमवार सुबह करीब चार बजे से ही भक्तों का गणेश मंदिर में आना शुरू हो गया।

दोपहर तक तो यह हालात हो गए कि एक के बाद एक श्रद्धालु आ रहे थे और भीड़ का रेला रुकने का नाम नहीं ले रहा था। हर किसी की जुबां से बप्पा के जयकारे ही सुनाई दे रहे थे।

कल्कि नगरी में घर घर विराजे गजानंद, गूंजा गणपति बप्पा मोरया

संभल। गणेश चतुर्थी पर कल्कि नगरी गणपति भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। सोमवार को मंदिरों और घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं के समक्ष दीप, धूप और पुष्प अर्पित कर श्रद्धालुओं ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर प्रसाद का वितरण भी किया गया।

गणेश चतुर्थी का मुख्य आकर्षण मुहल्ला हल्लू सराय स्थित श्री चामुंडा देवी मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा रही। शोभायात्रा का शुभारंभ होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। सबसे आगे पीले वस्त्रों में सजी महिलाएं और युवतियां हाथों में कलश लेकर चल रही थीं।

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उनके पीछे युवा डीजे की धुनों पर झूमते हुए गणपति बप्पा के जयकारे लगा रहे थे। जगह-जगह गुलाल उड़ने से माहौल उत्सव के रंग में रंग गया। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः श्री चामुंडा देवी मंदिर पहुंची। यहां विधिविधान से गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई।

इसके अलावा बरेली सराय, कोटपूर्वी, सरथल चौकी, मुहल्ला ठेर, शहजादी सराय हयातनगर और सरायतरीन आदि में भी शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस बल तैनात रहा।

तिवारी सराय स्थित मुन्नी माता मंदिर में 28 किलो वजन के पीतल की श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई। मंदिर समिति के प्रबंधक राज कुमार शर्मा ने बताया कि भगवान गणेश की यह प्रतिमा मुरादाबाद से लगभग 35 हजार रुपये की लागत से मंगाई गई है।

10 दिवसीय महोत्सव के दौरान गणपति जी की नियमित पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान होंगे। महोत्सव के उपरांत प्रतिमा को गंगा स्नान कराया जाएगा तथा पुनः मंदिर परिसर में प्रतिष्ठित किया जाएगा।

श्री गणेश चतुर्थी पर निकलीं शोभायात्राएं, धार्मिक धुनों पर झूमे श्रद्धालु

बहजोई। नगर में घर-घर विराजे गणपति बप्पा का श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद विभिन्न स्थानों से गणेश प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया गया। मां मंदिर से निकाली गई शोभायात्रा में गणपति बप्पा की प्रतिमा सजे हुए रथ पर विराजमान थी।

रथ के आगे डीजे पर बज रहीं धार्मिक धुनों पर युवक नृत्य करते हुए चल रहे थे। इस दौरान रथ से श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण भी किया गया। शोभायात्रा आर्य समाज रोड़, सराफा बाजार, थाना रोड,नया बाजार,गोला गंज, नारायण टोला होती हुई अपने गंतव्य स्थान पर जाकर समाप्त हो गई।

वहीं नगर के गोला गंज, नारायण टोला, श्री राधाकृष्ण मंदिर, शीतला मंदिर, थाना परिसर, रघुनाथ मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर और मुराव टोला से भी गणेश प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से स्थापित किए गए गणपति

सौंधन/जुनावई। सौंधन में शोभायात्रा गणेश मंदिर से प्रारंभ होकर मुहल्ला किला, मुहल्ला कठा, मुहल्ला बंगड़ी, सेठों वाली गली, सदर बाजार और बरसाना होते हुए मुख्य बाजार से निकली और गणेश मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।

शोभायात्रा से पूर्व गणेश मंदिर पर 36 घंटे के अखंड रामायण पाठ हुआ। झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा में मंदिर महंत इमरत गिरी, विजय बंसल, प्रेम सिंह यादव, जगपाल सिंह मक्खन यादव, महिपाल शर्मा, गिरधारी, देवेंद्र, उदयवीर यादव आदि रहे।

वहीं जुनावई के अजीजपुर-जुनावई मार्ग स्थित ऋषिपाल सिंह मेमोरियल पब्लिक स्कूल में गणेश प्रतिमा की स्थापना एवं अनावरण हुआ। पूर्व ब्लाक प्रमुख मुकेश कुमार यादव ने दीप प्रज्वलित कर प्रतिमा का अनावरण किया और पूजा-अर्चना की।

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