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1955 में दरवाजे पर आकर बैठ गया था हाथी का बच्चा... ऐसे हुई चंदौसी के मशहूर 21 दिवसीय गणेश महोत्सव की शुरुआत

Published: Sat, 12 Sep 2026 10:33 PM (IST)

चंदौसी में 66वां गणेश चौथ महोत्सव सर्वधर्म सद्भाव के साथ शुरू हो गया है, जो 21 दिनों तक चलेगा। लाखों ...और पढ़ें

चंदौसी गणेश मेले का फीता काटकर उदघाटन करते पांचों धर्मों के प्रतिनिधि। पंकज शर्मा

चंदौसी गणेश मेले का फीता काटकर उदघाटन करते पांचों धर्मों के प्रतिनिधि। पंकज शर्मा

HighLights

  1. ढोल-नगाड़ों के साथ मेला ग्राउंड पहुंचा गणपति बाबा का फूलडोल

जागरण संवाददाता, चंदौसी। मेला गणेश चौथ के 66वें महोत्सव का शनिवार को शुभारम्भ हो गया। मेले की सांप्रदायिक सद्भाव एवं सर्वधर्म समभाव की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हिंदू धर्म से पंडित मेवाराम शास्त्री, मुस्लिम धर्म से साबिर बाबा, सिख धर्म से ज्ञानी सुखप्रीत सिंह, ईसाई धर्म से पास्टर डैनियल मैसी तथा बौद्ध धर्म से एके सिंह ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया।

इससे पहले एसडीएम आशुतोष तिवारी, सीओ विवेक जावला, नगर पालिकाध्यक्ष लता वार्ष्णेय तथा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संत कुमार ने लाला भूपाल दास द्वार पर द्वार पूजन एवं गणेश आरती की। जीके सिल्वर स्टोन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। रंगारंग कार्यक्रम का संयोजन मेजर शशिकांत गुप्ता तथा संचालन प्रभात कृष्णा ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि सीडीओ गोरखनाथ भट्ट एवं सीएमओ डाॅ. तरुण पाठक की अगुवाई में गणपति बाबा का फूलडोल ढोल-नगाड़ों के साथ मेला ग्राउंड पहुंचा।

यहां मेला समिति के पदाधिकारियों ने बाबा की प्रतिमा को गणेश चौक स्थित गणेश स्तम्भ पर स्थापित किया। इस अवसर पर मेला मुख्य सचिव हरिगोपाल वार्ष्णेय, ललित किशोर गुप्ता, सुधीर गुप्ता, रविंद्र कुमार, मनोज गुप्ता, डा. राजीव गुप्ता, विनय सर्राफ, लोकेंद्र शर्मा, प्रजीत लालू, मेजर शशिकांत गुप्ता, सतेन्द्र मामा, मुकेश, राहुल चौधरी, संजय गुप्ता, अभिषेक गुप्ता आदि मौजूद रहे।

मेले में 500 जवान तैनात, ई-रिक्शा व चार पहिया वाहनों पर रोक, कल जीरो ट्रैफिक

संभल। चंदौसी में गणेश चतुर्थी मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया है। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर निकलने वाली महारथ यात्रा में करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए जिले के अलावा बरेली रेंज के विभिन्न थानों से करीब 500 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। रथयात्रा के दौरान प्रमुख मार्गों पर जीरो ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी।

अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि महारथ यात्रा के दौरान सीता रोड, सुंदर मुहल्ला, बिसौली गेट, बड़ा बाजार, घंटाघर, नमक मंडी, फड़याई बाजार, ब्रह्म बाजार, कैथल गेट और कैथल गेट पुल पर जीरो ट्रैफिक व्यवस्था रहेगी।

इन मार्गों पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच किसी तरह की अव्यवस्था न हो। इसके अलावा मेले के शुभारंभ से लेकर समापन तक सीता आश्रम से कैथल गेट की पुलिया तक ई-रिक्शा और चार पहिया वाहनों के संचालन पर भी पाबंदी लगा दी है।

पुलिस ने रूट डायवर्जन की व्यवस्था भी तैयार की है। महारथ यात्रा के दौरान वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जाएगा। रोडवेज बसों के लिए अस्थाई अड्डा बनाया गया है। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

ऐसे में रथयात्रा मार्ग पर जीरो ट्रैफिक व्यवस्था के साथ भीड़ नियंत्रण, यातायात संचालन और आपात स्थिति से निपटने को पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

मिट्टी के बप्पा से स्वचलित झांकी तक, 1961 से 2026 तक का सफर

चंदौसी। प्रसिद्ध गणेश महोत्सव की शुरुआत करीब 65 साल पहले 1961 में बहुत छोटे से रूप में हुई थी। उस समय नगर निवासी डा. गिरिराज किशोर ने अपने हाथों से बप्पा की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उसे ठेले पर रखकर शोभायात्रा निकाली थी।

कई सालों तक इसी प्रतिमा को शोभायात्रा में शामिल किया जाता रहा लेकिन बाद में जैसे जैसे वक्त बदला, यात्रा और बप्पा का स्वरूप भी बदलता गया। आज 18 स्वचालित झांकियों से सुसज्जित शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

यह मेला आसपास के जिलों के प्रमुख मेलों में जगह रखता है। मेले से भी ज्यादा पुराना इतिहास यहां के गणेश मंदिर का है, जिसके बनने के पीछे की कहानी भी अनूठी है। बताया जाता है कि आज जहां गणेश मंदिर है वहां साल 1955 में काफी जगह खाली पड़ी थी।

यहां लाला भूपालदास का मकान था। भूपालदास और पं. हनुमान प्रसाद काफी अच्छे मित्र थे। एक दिन उनके मकान के दरवाजे पर हाथी का एक बच्चा आकर बैठ गया। भूपालदास ने उसे वहां से हटाने की काफी कोशिश की लेकिन वह नहीं हटा।

उस समय हनुमानप्रसाद ने भूपाल से संकल्प दिलाया कि यहां वह एक गणेश मंदिर बनवा देंगे। इसके बाद हाथी का वह बच्चा एकदम न जाने कहां चला गया। इसके बाद भूपाल दास ने अपना संकल्प निभाते हुए करीब 1958 में वहां एक मंदिर बनवा दिया जो अब भव्य गणेश मंदिर में बदल चुका है।

सात दिन से 21 दिन का सफर, ऐसे बढ़ता रहा मेला

चंदौसी। साल 1961 में भूपालदास के पुत्र गिरिराज किशोर ने अपने हाथों से गणेश जी की एक मिट्टी की प्रतिमा बनाई और उसे ठेले पर रखकर शोभायात्रा निकाली। इसी दौरान मंदिर के सामने मेला सा लगने लगा जो धीरे-धीरे बढ़ता हुआ मेला रोड तक फैल गया।

यह मेला पहले सात दिन का लगता था लेकिन ग्राउंड में आ जाने के बाद यह 21 दिन चलने लगा। अब यहां करीब 300-350 दुकाने व स्टाल लगते हैं। मेले में नगर के ही नहीं बल्कि आसपास के लोग भी आते हैं। अब गणेश चतुर्थी पर यहा विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है।

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