चंदा देवी ने 75 की उम्र में किया कमाल, एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में जीता रजत पदक
75 वर्षीय चंदा देवी ने बेंगलुरु में आयोजित एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर संभल जिले का नाम रोशन किया है।

मेडल हासिल कर खुशी का इजहार करतीं तैराक चंदा देवी। सौ. स्वयं
HighLights
75 वर्षीय चंदा देवी ने एशियन मास्टर्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
बेंगलुरु में आयोजित प्रतियोगिता में नौ देशों के खिलाड़ी शामिल थे।
उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति उम्र को चुनौती देकर बनी प्रेरणास्रोत।
मनमोहन वार्ष्णेय, संभल। उम्र भले ही 75 वर्ष हो गई हो, लेकिन हौसले आज भी जवान हैं। चंदौसी के रुस्तगी मुहल्ले में बड़ा महादेव के पास रहने वाली चंदा देवी ने अपने जुनून और मेहनत से साबित कर दिया है कि उम्र किसी लक्ष्य को हासिल करने में बाधा नहीं बन सकती। करीब 20 वर्षों से तैराकी कर रहीं चंदा देवी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर संभल जिले का नाम रोशन किया है।
खास बात यह है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका तैराकी के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ है। वह नियमित रूप से स्विमिंग पूल में अभ्यास करती हैं और अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। उनका समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो बढ़ती उम्र के साथ अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।
दूसरा स्थान हासिल कर जीता रजत पदक
बेंगलुरु में चार से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में चंदा देवी ने 75 से 80 वर्ष आयु वर्ग में दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक जीता। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में नौ देशों के करीब 1500 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। कड़े मुकाबले के बीच उन्होंने अपने अनुभव, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।
चंदा देवी करीब दो दशक से तैराकी का अभ्यास कर रही हैं। इस दौरान वह राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुकी हैं। 75 वर्ष की उम्र में भी उनका नियमित अभ्यास जारी है। तैराकी के प्रति उनका जुनून और खुद को फिट रखने की लगन उनकी मेहनत और अनुशासन को दर्शाती है।
संभल जिले का बढ़ाया गौरव
चंदा देवी की उपलब्धि बताती है कि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र भी सपनों की राह नहीं रोक सकती। उन्होंने अपनी मेहनत और सफलता से न केवल चंदौसी, बल्कि पूरे संभल जिले का गौरव बढ़ाया है। उनका सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो उम्र बढ़ने के साथ अपनी इच्छाओं और सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
