सहारनपुर में साइबर फ्रॉड के डराने वाले आंकड़े, दस महीनों में 200 लोगों के साथ हुई 5.50 करोड़ से ज्यादा की ठगी
सहारनपुर में पिछले एक साल में 200 से अधिक लोग 5.50 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का शिकार हुए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को संदिग्ध साइबर लेनदेन की तुरंत सूचना देने का निर्देश।
सहारनपुर में 200 लोगों से 5.50 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी।
आरबीआई से साइबर सुरक्षा के नए नियम बनाने के लिए जवाब तलब।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट का ताजा और कड़ा रुख साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि संदिग्ध लेन-देन का पता चलते ही बैंकों को तुरंत नजदीकी थाने और संबंधित एजेंसियों को अलर्ट करना होगा। अब बैंक केवल ग्राहक की लापरवाही का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरबीआई से नए सुरक्षा नियमों के तहत जवाब तलब किए जाने के बाद जिले के साइबर थाना और ठगी के शिकार हुए सैकड़ों पीड़ितों में अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलने की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
जिले की बात करें तो साल 2026 में हर महीने औसतन 10 से 12 छोटे बड़े साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से कई शिकायतें पुलिस और साइबर सेल तक पहुंचती हैं। बीते एक साल में ही जिले के 200 लोगों को करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये से अधिक की चपत लग चुकी है।
अधिकांश मामलों में ठगों द्वारा रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर करते ही बैंक का फ्राड मानिटरिंग सिस्टम अलर्ट जारी करने में देरी कर देता है। इस देरी का फायदा उठाकर अपराधी रकम की लेयरिंग कर उसे अलग-अलग फर्जी यानी म्यूल खातों से निकाल लेते हैं।
अनुमानित तौर पर वर्तमान में जिले की साइबर सेल केवल 30 से 35 प्रतिशत मामलों में ही रकम फ्रीज कराने में सफल हो पाती है। वहीं, रिफंड की कानूनी प्रक्रिया जटिल होने के कारण अनुमानित तौर पर सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत पीड़ितों के हाथ ही उनका पैसा वापस आ पाता है।
केस वन
साइबर ठगों द्वारा कुकाइन एप के माध्यम से मिंग क्वाइन नामक फर्जी प्लेटफॉर्म पर कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर जनकपुरी थाना क्षेत्र के व्यक्ति से एक करोड़ 31 लाख रुपये की ठगी अक्तूबर माह में हुई थी।
केस दो
ब्रह्मपुरी कॉलोनी के एक निवासी से वनटच एकेडमी में हर महीने 5 से 10% मुनाफे का लालच देकर 10 लाख रुपये ठगने का मामला भी हाल ही में दर्ज हुआ है।
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साइबर ठगी से बचाव के लिए यह बरते सावधानी
- निजी जानकारी साझा न करें
- अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक अकाउंट नंबर, पासवर्ड कभी किसी के साथ फोन, मैसेज या ईमेल पर साझा न करें।
- किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज, लुभावने आफर, या अज्ञात ईमेल में दिए गए लिंक एपीके फाइल या एप पर क्लिक न करें।
- यदि कोई वीडियो काल या फोन काल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या आरबीआई अधिकारी बताकर डराता है या आइसोलेशन में रहने का दबाव डालता है, तो तुरंत कॉल काट दें।
साइबर ठगी के मामलों को लेकर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ठगी किया गया रुपया भी साइबर सेल वापस करा रही है।- व्योम बिंदल, एसपी सिटी व नोडल साइबर क्राइम
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