घर बैठे 20 लाख रुपये तक मुनाफा कमा रही 10वीं पास पूजा, शादी के बाद शुरू किया था कारोबार, अब बनीं मिसाल
मुर्तजापुर की पूजा सैनी ने शादी के बाद कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर घर से मशरूम उत्पादन शुरू किया। ...और पढ़ें

मशरूम के साथ पूजा सैनी। जागरण
HighLights
शादी के बाद कृषि विज्ञान केंद्र से लिया मशरूम प्रशिक्षण।
घर से शुरू कर सालाना 15-20 लाख रुपये का मुनाफा।
दिल्ली-देहरादून तक करती हैं विभिन्न मशरूम की सप्लाई।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। अगर इरादे मजबूत हों तो घर की चारदीवारी भी सफलता की बड़ी इबारत लिख सकती है। मुर्तजापुर की पूजा सैनी इसकी मिसाल हैं। महज 10वीं पास पूजा ने शादी के बाद पति के साथ मिलकर घर से मशरूम उत्पादन शुरू किया।
शुरुआत सिर्फ दो बैग से हुई थी, लेकिन मेहनत, प्रशिक्षण और लगातार प्रयास ने इस छोटे से काम को बड़े कारोबार में बदल दिया। आज पूजा एक समय में 5 से 6 हजार बैग में मशरूम तैयार कर रही हैं और सालाना करीब 15 से 20 लाख रुपये की बचत कर रही हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र से लिया प्रशिक्षण
महिलाओं के लिए स्वरोजगार की मिसाल बनीं बेहट के गांव मुर्तजापुर की पूजा सैनी मशरूम लेडी के नाम से पहचान बना रही हैं। पूजा ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की। शादी के तीन महीने बाद उन्होंने पति के साथ कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद घर पर ही प्रयोग के तौर पर दो बैग तैयार किए। शुरुआती अनुभव अच्छा रहा तो धीरे-धीरे बैगों की संख्या बढ़ती गई और आज यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। मशरूम उत्पादन के लिए पूजा भूसे का इस्तेमाल करती हैं। एक बैग तैयार करने में करीब 60 से 120 रुपये का खर्च आता है।
200 रुपये प्रति किलो तक कीमत
पूजा के अनुसार, एक बैग से लगभग तीन से पांच किलो तक मशरूम निकल जाती है। बैग तैयार होने के करीब 15 से 20 दिन बाद उत्पादन शुरू हो जाता है और तीन से चार महीने तक मशरूम मिलती रहती है।
पूजा कई तरह की मशरूम का उत्पादन करती हैं। इनमें मिल्की, ओयस्टर, बटन, ढींगरी, पोटबेलो और कीड़ा-जड़ी जैसी किस्में शामिल हैं। बाजार में उनकी मशरूम की कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है।
दिल्ली और देहरादून तक सप्लाई
पूजा की मेहनत अब सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं है। उनके यहां तैयार होने वाली मशरूम की सप्लाई दिल्ली और देहरादून तक हो रही है। पूजा के मुताबिक बाजार में उनकी उपज की मांग इतनी अधिक है कि कई बार वह पूरी डिमांड भी पूरी नहीं कर पातीं।
पूजा कहती हैं कि उन्हें इस बात की खुशी है कि घर से बाहर निकले बिना वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। उनके पति भी इस काम में उनका पूरा सहयोग करते हैं।
