विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अपमान और असफलता से टूटने के बजाय मौन रहें, भगवद्गीता से सीखें जीवन जीने की सही कला

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:00 AM (IST)

भगवद्गीता के जीवनोपयोगी सिद्धांत जो व्यक्ति को निराशा में भी आंतरिक शक्ति और सच्चा ज्ञान प्राप्त करने में मदद करते हैं।

भावनाओं पर काबू पाने के लिए भगवद गीता की सीख (Picture Credits- AI Images)

भावनाओं पर काबू पाने के लिए भगवद गीता की सीख (Picture Credits- AI Images)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जीवन में आपको कभी न कभी ऐसा जरूर महसूस होगा कि आप कमजोर पड़ चुके हैं और निराशा के कगार पर खड़े हैं, जहां अपना-पराया कोई आपके काम नहीं आएगा। लेकिन इन्हीं पलों, जब नुकसान, विश्वासघात और असफलता व्यक्ति को अंदर तक हिला कर रख देती है, तभी सच्चा ज्ञान मिलता है।

भगवद्गीता हमें सिखाती है कि, जब आपका मन शुद्ध होता है तो हानि भी सुरक्षा बन जाती है। सच्ची शक्ति, सच्चा समर्पण, समार्थ्य, डर या गुस्से से नहीं, बल्कि आपके प्यार, स्पष्टता और आपके अंदर छिपे गहरे सत्य से काम करने के साहस से आती है। जीवन में व्यक्ति को कुछ खास बातों पर अमल करने की जरूरत है, जो भगवद्गीता में भी बताई गई है।

मौन आपकी सबसे बड़ी ताकत है

जीवन की पहली सच्चाई जितनी मुश्किल दिखाई देती है, असल में उतनी ही सरल है। कभी-कभी जीत का मतलब बड़े दिन वाला होना ही होता है। आपको बेवजह की बहस करने, खुद को साबित करने या जीतने की जरूरत नहीं है। लाइफ में पीछे हटने का मतलब कमजोरी या हार मानना नहीं है, बल्कि यह आपके आत्मसम्मान, आदर्शों और आपकी गरिमा को दर्शाता है।

जब जीवन आपको अपमानित करें या लोगों से आपको धोखा मिले, तो सबसे सशक्त प्रतिक्रिया अक्सर मौन, संयम और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना ही होती है। यह शक्ति का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है। आपका शांत होना इस बात को दर्शाता है कि आप अपने आत्मसम्मान को सौंपने से इनकार कर दें, तो कोई उसे छीन नहीं सकता।

सोचने के बाद ही कोई फैसला लो

जब व्यक्ति दुख में होता है, तो उसमें दया और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता आती है। मन की भावनाएं दुश्मन नहीं, बल्कि संकेत हैं जो बतातीं हैं कि हमारे मन में क्या चल रहा है। जब व्यक्ति दुख से घबराता नहीं और सुख से बहकता नहीं है, तो वह अपने फैसले शांति और बेहतर तरीके से लेता है।

भगवद्गीता के अनुसार, कोई भी व्यक्ति या कोई भी चीज यह फैसला नहीं कर सकती है कि, आप कैसा महसूस करते हैं। आपके जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना के पीछे आपका ही हाथ होता है। ऐसे में आप गुस्से की जगह प्यार और समझदारी को चुनकर अपने व्यक्तित्व को बेहतर बना सकते हैं। यह आपको बाहरी शोर में धकेलने की बजाय शांत और खुशनुमा महसूस कराएगी।

भगवद्गीता में कहा गया है कि, प्यार कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे जमा करने या उससे लाभ कमाने की आशा रखा जाए। प्यार आपके अस्तित्व का सार है। यह सृष्टि में मौजूद वो वस्तु है जो आपके कण-कण में समाहित है। बिना किसी अपेक्षा के दूसरों से प्यार करना ही ईश्वर के प्रति सम्मान भावना को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें- श्रीमद्भगवद्गीता में बताए गए ऐसे 5 सत्य जो आपको जरूर जानने चाहिए, जीवन को मिल सकती है नई दिशा

यह भी पढ़ें- आत्मा मरती नहीं, बस शरीर बदलती है: भगवद्गीता के इस श्लोक से समझें मौत के बाद चेतना का क्या होता है

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।