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मिनी नंदिनी योजना से साहीवाल और गिर गायों की खरीद हुई आसान, नंद बाबा मिशन को मिलेगा बढ़ावा

Published: Fri, 16 Oct 2026 02:00 PM (IST)

मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत अब पशुपालकों को साहीवाल और गिर जैसी उन्नत नस्ल की गाय खरीदने के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं होगी।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. मिनी नंदिनी योजना में गाय खरीद प्रक्रिया हुई सरल।

  2. पशुपालक अब दूसरे राज्यों के व्यापारियों से गाय मंगा सकेंगे।

  3. समय और खर्च की बचत, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत गायों की खरीद प्रक्रिया में बदलाव किया है।

नई व्यवस्था से योजना में चयनित पशुपालकों को साहीवाल और गिर जैसी उन्नत नस्ल की गाय खरीदने के लिए गुजरात, राजस्थान या दूसरे राज्यों में खुद जाने की जरूरत नहीं होगी। वे दूसरे राज्यों के व्यापारियों के माध्यम से भी गाय मंगा सकेंगे। इससे समय और अतिरिक्त खर्च बचने की उम्मीद है।

कम होगी खरीद की भागदौड़

अब तक दूसरे राज्यों से गाय खरीदने के लिए पशुपालकों को संबंधित प्रदेशों तक जाना पड़ता था। आने-जाने का खर्च और समय लगने के साथ पशुओं के चयन में भी कई तरह की परेशानियां आती थीं। नई व्यवस्था में पशुपालक दूसरे राज्यों के व्यापारियों से संपर्क कर गाय मंगाने का विकल्प चुन सकेंगे। इससे खरीद के लिए होने वाली भागदौड़ कम होगी और उनके सामने विकल्प भी बढ़ेंगे।

योजना के तहत साहीवाल और गिर जैसी उन्नत नस्लों को महत्व दिया जा रहा है। इन नस्लों की गायों में पशुपालकों की रुचि रहती है। बेहतर नस्ल के पशुओं के पालन से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।

दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में खरीद प्रक्रिया सरल बनाने की पहल भी इसी दिशा में है। गाय खरीदने के लिए दूसरे राज्यों तक जाने की जरूरत कम होने से पशुपालकों को आर्थिक और व्यावहारिक राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. एमपी सिंह गौर ने बताया कि नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को योजना के निर्धारित नियमों और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इससे गायों की खरीद में आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं और उन्नत नस्ल के पशुओं के पालन को प्रोत्साहन मिलेगा।

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