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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भीम आर्मी प्रमुख रावण ने गिरफ्तारी से बचने को बदले 16 ठिकाने

By Nawal MishraEdited By:
Published: Thu, 08 Jun 2017 08:47 PM (IST)Updated: Thu, 08 Jun 2017 09:19 PM (IST)

सहारनपुर जातीय हिंसा के आरोपी भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर ने गिरफ्तारी से बचने 28 दिन में 16 स्थान बदले।

भीम आर्मी प्रमुख रावण ने गिरफ्तारी से बचने को बदले 16 ठिकाने
भीम आर्मी प्रमुख रावण ने गिरफ्तारी से बचने को बदले 16 ठिकाने

सहारनपुर (जेएनएन)। सहारनपुर जातीय हिंसा के आरोपी भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर ने गिरफ्तारी से बचने 28 दिन में 16 स्थान बदले। 21 मई को दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बाद वह हरिद्वार, वहां से दिल्ली, गुडगांव, करनाल, पानीपत, जालंधर, होशियारपुर होता हुआ डलहौजी पहुंचा। इस दौरान जहां भी वह रुका वहां तीन बार लोकेशन बदल देता था। मोबाइल पर भी फेसबुक कॉल के जरिए ही बात करता था। इसके लिए ज्यादातर वाई-फाई की सुविधा वाली जगह चुनता था। उसके जिन मित्रों के नंबर सर्विलांस पर थे उनको गलत लोकेशन बताता रहता था ताकि पुलिस उस तक न पहुंच पाए। तीन दिन पहले उसने एक मित्र को पंजाब के होशियारपुर से पुणे जाने की जानकारी दी थी, जबकि उस वक्त वह डलहौजी जा रहा था। नौ मई को हुई जातीय ङ्क्षहसा में चंद्रशेखर के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज हुए थे। उसकी फरारी ने कई हफ्तों से शासन और प्रशासन की नींद हराम कर रखी थी। 

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सुरक्षा के भारी बंदोबस्त

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि  शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर रावण को रिमांड पर लेकर हिंसा के पीछे राजनीतिक कनेक्शन, भीम आर्मी को कहां-कहां से हुई फडिंग आदि के बारे में पुलिस पूछताछ करेगी। उन्होंने  बताया कि पर्याप्त पुलिस के अलावा आरएएफ व पीएसी की सात-सात कंपनी संवेदशनशील स्थानों पर तैनात कर दी गयी हैं। दलित बहुल क्षेत्रों में आरएएफ व पीएसी मुस्तैद है। जिले में धारा 144 सख्ती से लागू कर दी है। 

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क्या है मामला

पांच मई को शब्बीरपुर में की गयी आगजनी व संघर्ष में घायल दलितों ने मुआवजा के लिए नौ मई को भीम आर्मी के नेतृत्व में सहारनपुर में धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने कई जगह तोडफ़ोड़ व पुलिस चौकी और कई वाहन फूंक दिए। 24 मुकदमे दर्ज कर 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। शब्बीरपुर में 23 मई को मायावती दौरे से पहले और बाद में भी जातीय हिंसा भड़की थी। इसमें एक की जान चली गई थी। कई घायल हुए थे।