खेतों की पगडंडी से दौड़ना शुरू कर एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीतने वाली प्राची चौधरी बोलीं- 'ओलिंपिक गोल्ड है मेरा लक्ष्य'
Prachi Chaudhary: सहारनपुर की प्राची चौधरी ने जापान में चल रहे 20वें एशियन गेम्स की 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जापान के आइची नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स में सहारनपुर की बेटी ने एक बार फिर से इतिहास रचा है। शनिवार को महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में प्राची चौधरी ने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। फोन पर बातचीत में प्राची ने कहा कि देश के लिए ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतना ही उनका मकसद है।
एशियाई खेल-2026 के सातवें दिन शंनिवार को भारत को एथलेटिक्स में बड़ी खुशखबरी मिली। भारतीय स्टार धाविका गांव झबीरण निवासी प्राची ने 400 मीटर दौड़ के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
एशियाड में प्राची ने 53.21 सेकंड के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। रेस के दौरान अंदरूनी लेन में दौड़ रही प्राचीं ने आखिरी 100 मीटर में गजब की रफ्तार दिखाई। प्राची की जीत पर गांव में उत्साह का माहौल है। प्राची के पिता जयवीर ने कहा कि बेटी को सफलता के शिखर पर देखना चाहते हैं। बोले कि बेटी ने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया है।
वहीं पदक जीतने के बाद दैनिक जागरण से फोन पर बातचीत में प्राची ने कहा कि उनका असली मकसद ओलिंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
बताया कि अभी उनका एशियन गेम्स में 400 मीटर रिले दौड़ में प्रतिभाग करना बाकी है। यह रिले रेस 29 सितंबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें वह प्रतिभाग करेंगी। प्राची युवा विकास दल अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
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कड़े संघर्ष के दौर से गुजरी हैं प्राची
गांव झबीरन में 20 सितंबर 1996 में जन्मीं एथलीट प्राची की अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कहानी संघर्षों से भरी है। अभावों के बीच भी प्राची ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। प्राची के पास शुरुआत में अभ्यास करने के लिए कोई आधुनिक ट्रैक या मैदान नहीं था। वे अपने गांव में खेतों की मेड़ और कच्ची पगडंडियों पर दौड़कर अभ्यास करती थीं। उनके पिता जयवीर एक साधारण किसान हैं।
प्राची को एथलेटिक्स के खास जूते (स्पाइक्स) दिलाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उस वक्त पैसे उधार लेकर बेटी को जूते दिलाए, ताकि वह अपना सपना पूरा कर सके। कई बार आर्थिक तंगी के कारण प्राची को फटे हुए जूते पहनकर ही कड़ा अभ्यास करना पड़ा, लेकिन दौड़ना बंद नहीं किया। इससे पूर्व प्राची ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदक जीते हैं।
