किताबों से आगे बढ़ा ज्ञान: यूपी के सरकारी स्कूलों में बच्चे खुद बनाएंगे सोलर कार, LED टॉर्च और टेलीस्कोप
परिषदीय विद्यालयों में 'लर्निंग बाय डूइंग' योजना के तहत छात्र अब किताबों के बजाय प्रयोगों से विज्ञान सीखेंगे, जिसमें सोलर कार और टेलीस्कोप जैसे मॉडल बनाना शामिल है।

एआई इमेज
HighLights
मंडल के 83 स्कूलों के लिए मिला 33.20 लाख रुपये का बजट
राधेश्याम, रामपुर। परिषदीय विद्यालयों में अब छात्र सिर्फ किताबों से विज्ञान नहीं पढ़ेंगे, बल्कि खुद मॉडल तैयार कर प्रयोगों के जरिये सीखेंगे। लर्निंग बाय डूइंग योजना के तहत छात्र सोलर कुकर, एलईडी टॉर्च, सोलर कार, दूरदर्शी टेलीस्कोप और मोबाइल प्रोजेक्टर जैसे मॉडल बनाना सीखेंगे।
इसके लिए मुरादाबाद मंडल के 83 चयनित विद्यालयों को 40-40 हजार रुपये की दर से कुल 33.20 लाख रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। समग्र शिक्षा के तहत चयनित प्रदेश के 1,688 उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव देना और विज्ञान, गणित सहित विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को गतिविधियों के माध्यम से समझाना है।
योजना के तहत छात्र मिट्टी और पानी का परीक्षण करने के साथ प्लास्टिक की बोतलों से खिलौने बनाना, वर्मी कंपोस्ट तैयार करना, औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करना और फल-सब्जियों से अचार बनाना भी सीखेंगे।

इसके अलावा गुड़ और मूंगफली की चिक्की तैयार करने, कढ़ाई-सिलाई, प्राकृतिक रंग बनाने, पेंटिंग और वाद्ययंत्र तैयार करने जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी। छात्रों को स्मार्टफोन के लिए प्रोजेक्टर, डीसी झालर और विभिन्न उपयोगी माडल बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन गतिविधियों के लिए विद्यालयों में आवश्यक सामग्री खरीदी जाएगी, ताकि बच्चे खुद प्रयोग कर सकें और सीखी गई बातों को व्यवहार में उतार सकें। विद्यालयों को निर्धारित समय सीमा में सामग्री खरीदनी होगी।
लर्निंग बाय डूइंग योजना का उद्देश्य बच्चों में बैज्ञानिक सोच, प्रयोग की आदत और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना है। इससे बच्चे सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि खुद प्रयोग करके सीखेंगे। जिले के 14 विद्यालयों को 5.60 लाख रुपये की धनराशि मिली है। सभी प्रधानाध्यापक निर्धारित समयसीमा में सामग्री की खरीद करें और गतिविधियों की निधमित रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड सुनिश्चित करें।
- कल्पना देवी, बीएसए
यह भी पढ़ें- रामपुर में अखिलेश की एंट्री महज इत्तेफाक नहीं! 2027 चुनाव से पहले सपा के लिए क्यों जरूरी हुए आजम खान?