रामपुर में अखिलेश की एंट्री महज इत्तेफाक नहीं! 2027 चुनाव से पहले सपा के लिए क्यों जरूरी हुए आजम खान?
अखिलेश यादव का रामपुर दौरा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए आजम खान की अहमियत को दर्शाता ...और पढ़ें

अखिलेश यादव और आजम खान
HighLights
मंडल की विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं मुस्लिम
पिछले चुनाव में 27 सीटों में सपा की झोली में आई थीं 17
अनिल अवस्थी, रामपुर। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के 18 अक्टूबर के दौरे के बाद रामपुर में सपा मुखिया अखिलेश यादव का आगमन महज इत्तेफाक नहीं है और न ही अखिलेश का आजम के बड़े बेटे अदीब के कंधे पर हाथ रखना और ‘आजम थे, हैं और रहेंगे’ कहना। सोची-समझी रणनीति के तहत अखिलेश यहां पहुंचे। इसकी कई वजह हैं। मुरादाबाद मंडल की मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा की 27 सीटें।
वर्ष 2022 में प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल में भाजपा ने 10 और सपा ने 17 सीटें जीती थीं। रामपुर व आसपास के जिलों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
जिले के स्वार में मुस्लिम मतदाताओं की करीब 61 प्रतिशत, चमरौआ में 60, रामपुर सदर में 64, बिलासपुर में 41 और मिलक में 30 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है। वहीं, मंडल में मुस्लिम आबादी का औसत 40 प्रतिशत के करीब हैं।
इन पर आजम खान का व्यापक असर माना जाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आजम समाजवादी पार्टी के लिए सिर्फ एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता नहीं, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे, रामपुर की सियासत और पार्टी की पुरानी राजनीतिक पहचान से जुड़ा चेहरा हैं।
सपा के संस्थापक सदस्यों में एक आजम खान लंबे समय तक सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में रहे हैं। लंबे समय से कानूनी दांव-पेंच में उलझने और जेल काटने के चलते उनके प्रति मुस्लिमों में हमदर्दी की लहर भी है।
ऐसे में विधानसभा चुनाव में भले ही आजम खान सीधे तौर पर प्रतिभाग न कर पाएं मगर उनका असर रहेगा ही। इसलिए सपा को पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में और बेहतर प्रदर्शन के लिए आजम खान का साथ जरूरी है।
जबकि, पिछले साल भर से अखिलेश के एक बार भी रामपुर आकर आजम से मुलाकात न करने से आजम समर्थकों में उनके प्रति नाराजगी भी है। इंटरनेट मीडिया पर वह इसे व्यक्त भी करते रहते हैं।
अब जब ओवैसी रामपुर आकर आजम के प्रति हमदर्दी जताकर और अखिलेश को मुस्लिमों का सिर्फ उपयोग करने वाला बता गए तो अखिलेश के लिए यह खतरे का संकेत बन गया।
वहीं आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा प्रेस वार्ता में भी कह चुकी थीं कि अखिलेश ने उनके आमंत्रण पर रामपुर आने की बात कही है। ऐसे में अगर अखिलेश न आते तो लोगों का गुस्सा और बढ़ सकता था।
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो जेल में मुलाकात को पहुंचते ही आजम खान ने अखिलेश से सख्त नाराजगी जताई। लगभग साल भर बाद मिलने आने पर तंज भी कसे। मगर अखिलेश ने उफ तक न की, हमेशा पार्टी सहित उनका साथ निभाने का वादा दोहराया।
यही वजह रही कि जेल से बाहर आते ही अखिलेश ने मीडिया के सामने कहा कि सपा के सहयोगी दलों के प्रत्याशियों की सूची फाइनल करने के लिए आजम खान से राय मशविरा किया है। यह कहकर उन्होंने लोगों को संदेश देने का प्रयास किया कि वह आज भी आजम की मंशानुरूप ही अपने निर्णय को अंतिम रूप देते हैं।
