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आजम के गढ़ रामपुर में पुराने चेहरों पर दांव लगाएगी भाजपा, इतिहास रचने वाले आकाश सक्सेना पर ज्यादा भरोसा

Published: Sun, 25 Oct 2026 07:55 PM (IST)

भाजपा रामपुर विधानसभा चुनाव में पुराने चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है, जिसमें बिलासपुर से बलदेव सिंह औलख ...और पढ़ें

जिलाध्यक्ष भाजपा हरीश गंगवार, विधायक आकाश सक्सेना, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और विधायक राजबाला। क्रमश:

जिलाध्यक्ष भाजपा हरीश गंगवार, विधायक आकाश सक्सेना, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और विधायक राजबाला। क्रमश:

HighLights

  1. बिलासपुर से बलदेव सिंह औलख को तीसरी बार टिकट।

  2. मिलक से राजबाला भी तीसरी बार विधायक पद की दावेदार।

  3. आकाश सक्सेना पर शहर सीट के लिए भाजपा का भरोसा।

जागरण संवाददाता, रामपुर। विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। भाजपा की ओर से चौथा सर्वे शुरू हो गया है। आजम खान का गढ़ माने जाने वाले रामपुर में इस बार भी पार्टी ज्यादातर पुराने चेहरों पर ही दांव लगा सकती है। यहां पांच विधानसभा क्षेत्र हैं, इनमें बिलासपुर से दो बार से बलदेव सिंह औलख विधायक हैं।

पहली बार विधायक बनने पर योगी सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया था। दूसरी बार भी वह राज्यमंत्री बने। चर्चा है कि अब तीसरी बार भी पार्टी उन्हें ही टिकट दे सकती है। ठीक यही स्थिति सुरक्षित मिलक विधानसभा सीट की है। इस सीट से राजबाला दो बार से विधायक हैं। उनका टिकट भी कटना मुश्किल है।

इसके अतिरिक्त शहर विधानसभा सीट पर सबसे मजबूत दावेदारी वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना की ही मानी जा रही है। शहर विधानसभा सीट प्रदेश की हाट सीट में गिनी जाती है, क्योंकि यह सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खां का गढ़ है। आजम खां इस सीट से 10 बार विधायक चुने गए हैं।

उप चुनाव में आकाश सक्सेना ने रचा था इतिहास

17 नवंबर 2025 को उन्हें दो पैन कार्ड मामले में सजा हुई थी, जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी। तब यहां उप चुनाव हुए, जिसमें भाजपा की ओर से आकाश सक्सेना को प्रत्याशी बनाया गया और उन्होंने चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। ऐसे में फिलहाल उनके मुकाबले इस सीट पर कोई मजबूत दावेदार नहीं है। पार्टी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है।

बाकी बची दो सीट स्वार-टांडा और चमरौआ पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। चमरौआ सीट पर पार्टी ने दो बार (2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में) मोहन कुमार लोधी को टिकट दिया था, लेकिन दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी इस हार को कारण मानकर दूसरे दावेदार भी टिकट की दौड़ में हैं।

स्वार विधानसभा सीट की बात करें तो यह सीट भी लंंबे समय से भाजपा के हाथ से खिसकती रही है। यहां ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे हैं। पिछली बार भाजपा के सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी शरीफ अहमद अंसारी को टिकट दिया गया और वह चुनाव जीत गए थे। इस बार पार्टी यहां जीत के लिए क्या गणित लगाती है, यह आने वाला समय बताएगा।

पांचों सीटों पर भाजपा की जीत का लक्ष्य

टिकट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा फाइनल किया जाता है। पार्टी जिसे भी टिकट देगी, स्थानीय कार्यकर्ता पूरी मेहनत व ईमानदारी से उसे चुनाव लड़ाएंगे। हमारा लक्ष्य पांचों विधानसभा सीटों को जीतना है और उसी के अनुसार तैयारी चल रही है।

-हरीश गंगवार, जिलाध्यक्ष भाजपा।

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